नयी दिल्ली, 11 जुलाई राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने अरुणाचल प्रदेश में नमदाफा बाघ अभयारण्य के मुख्य क्षेत्र से 310 हेक्टेयर वन भूमि को अरुणाचल सीमांत राजमार्ग (एनएच-913) के निर्माण के लिए स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब समिति के कुछ सदस्यों ने अपर्याप्त वन्यजीव शमन उपायों और 1.50 लाख से अधिक पेड़ों की योजनाबद्ध कटाई पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार चांगलांग जिले में यह परियोजना खारसांग के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच)-215 को मियाओ-गांधीग्राम-विजयनगर सड़क से जोड़ती है, जो भारत-म्यांमा सीमा के निकट रणनीतिक एनएच-913 कॉरिडोर का एक खंड है।
अरुणाचल प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने मध्यवर्ती लेन बनाने के लिए 248.79 हेक्टेयर वन भूमि और मलबा निपटान के लिए 61.21 हेक्टेयर भूमि मांगी थी।
समिति के सदस्य सचिव ने 26 जून को कहा था कि परियोजना प्रस्ताव के संबंध में समिति के सदस्यों एच एस सिंह और आर सुकुमार तथा राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन (सीडब्ल्यूडब्ल्यू) के साथ बैठक हुई थी।
सदस्य सचिव ने कहा कि पशु मार्ग योजना में पर्याप्त स्थल-विशिष्ट अनुसंधान का अभाव था और कई प्रस्तावित संरचनाएं ‘‘प्रभावी वन्यजीव आवागमन के लिए बनाए गए डिजाइनों के बजाय मानक पीडब्ल्यूडी पुलिया या सेतु डिजाइनों का अनुसरण करती हैं।’’
सुकुमार ने दो प्रमुख मुद्दे उठाते हुए सड़क के सामरिक महत्व को स्वीकार किया, जिसे दो वर्ष पहले ही सभी मौसमों में खुले रहने वाले गलियारे के रूप में मंजूरी दी जा चुकी है।
सुकुमार ने कहा, ‘‘सबसे पहले, इस योजना के परिणामस्वरूप लगभग 1,55,000 पेड़ों को काटा जाएगा और इतने व्यापक चौड़ीकरण का औचित्य स्पष्ट नहीं है। दूसरा, पशु मार्ग योजना को वन्यजीवों की मौजूदगी और पार करने के बिंदुओं के संबंध में वास्तविक जमीनी हकीकत के साथ संरेखित किया जाना चाहिए और मौजूदा योजना इस संबंध में कमजोर है।’’
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