देश की खबरें | छत्तीसगढ़ नन की गिरफ्तारी: सीबीसीआई ने अल्पसंख्यकों के प्रति ‘ द्वेष के माहौल' पर दुख व्यक्त किया

नयी दिल्ली, 28 जुलाई कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) ने हाल में छत्तीसगढ़ में केरल की दो नन की गिरफ्तारी को रेखांकित करते हुए सोमवार को देश में अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति व्याप्त ‘‘शत्रुता और हिंसा’’ के माहौल पर ‘‘गहरी पीड़ा और चिंता’’ व्यक्त की।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, इन नन को मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण की शिकायत के बाद गिरफ्तार किया गया था।

आर्चबिशप ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में चेतावनी दी कि संवैधानिक राज्य का विघटन और भारतीय लोकतंत्र की स्वतंत्र संस्थाओं का सांप्रदायीकरण इतना गंभीर है कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

आर्चबिशप अनिल जोसेफ थॉमस कॉउटो ने संवाददाता सम्मेलन में सीबीसीआई के बयान को पढ़ते हुए कहा, ‘‘कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया देश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ बढ़ते द्वेष और हिंसा के माहौल पर अपनी गहरी पीड़ा और चिंता व्यक्त करता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सांप्रदायिक तत्वों के बढ़ते हमलों और कानून लागू करने तथा संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालने वालों की चिंताजनक उदासीनता के बीच, अल्पसंख्यक भय और पीड़ा से ग्रस्त होकर खुद को लगातार असुरक्षित पा रहे हैं। इन गंभीर घटनाक्रमों के मद्देनज़र, सीबीसीआई राष्ट्र से यह आह्वान कर रहा है।’’

आर्चबिशप ने महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक गोपीचंद पडलकर के एक बयान को रेखांकित किया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि गांवों में धर्मांतरण के लिए आने वाले की जो भी पिटाई करेगा, उसे वह नकद पुरस्कार देंगे।

आर्चबिशप ने कहा कि विधायक के खिलाफ प्राथमिकी तक दर्ज नहीं की गई, जबकि ‘‘इसके विपरीत सोशल मीडिया पोस्ट या शांतिपूर्ण असहमति जैसी कम गंभीर अभिव्यक्तियों के लिए छात्रों, कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं के खिलाफ अक्सर त्वरित कानूनी कार्रवाई देखी जाती है।’’

उन्होंने छत्तीसगढ़ की घटना को ‘‘परेशान करने वाली’’ बताते हुए कहा कि नन को कथित तौर पर ‘‘सांप्रदायिक तत्वों’’ के इशारे पर गिरफ्तार किया गया।

यह पूछे जाने पर क्या सीबीसीआई बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की मांग करेगा तो उन्होंने कहा, ‘‘जो भी संगठन इन राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में लिप्त होता है, हम उसे नहीं छोड़ते... हम चुपचाप बैठकर यह नहीं कहते कि उन्हें अनुमति दी जाए... यदि आवश्यक हो तो हम मांग कर सकते हैं कि उन पर प्रतिबंध लगाया जाए। हम यह कहने से डरते नहीं हैं।’’

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