इस सप्ताह कई मीडिया संस्थानों ने आईफोन विनिर्माता एप्पल को चीन द्वारा अलग-थलग किए जाने की खबर भी दी है।
चीन सरकार के अपने कर्मचारियों को आईफोन के इस्तेमाल से रोके जाने की खबरें आने से एप्पल के शेयरों में बृहस्पतिवार को तीन प्रतिशत की गिरावट आई। इसके शेयरों में सप्ताह भर में पांच प्रतिशत से भी अधिक की गिरावट आ चुकी है।
ब्रिटेन के निवेश मंच ‘इंटरैक्टिव इन्वेस्टर’ में निवेश प्रमुख विक्टोरिया स्कोलर ने कहा, ‘‘चीन अब अमेरिकी प्रौद्योगिकी पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है, लेकिन यह (रोक) एप्पल के लिए बड़ी चुनौती है। चीन उसका सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार है और उसके राजस्व का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा वहीं से आता है।’’
एप्पल से इस संबंध में जानकारी हासिल करने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उसकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने आईफोन के इस्तेमाल पर रोक के बारे में पूछे गए सवाल का सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने केवल इतना कहा, ‘‘ किसी भी देश के उत्पादों तथा सेवाओं का चीन के बाजार में स्वागत है, जब तक वे चीन के कानूनों तथा विनियमों का अनुपालन करते हैं। ’’
अमेरिका और चीन के बीच पहले से ही कायम तनाव पिछले महीने उस समय और बढ़ गया था, जब अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने चीन में अमेरिकी उच्च प्रौद्योगिकी के निवेश पर पाबंदियां लगाने और उन्हें नियमों के दायरे में लाने के लिए एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। यह दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।
आईफोन पर कथित प्रतिबंध की खबर ऐसे समय में आई है, जब एप्पल 12 सितंबर को अपने इस फोन का नवीनतम संस्करण जारी करने की तैयारी में है। उसके आईफोन-15 का अनावरण करने की उम्मीद है।
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