देश की खबरें | सेन्ट्रल विस्टा परियोजना में जमीनी स्तर पर कोई भी बदलाव प्राधिकारियों के जोखिम पर होगा : न्यायालय
जियो

नयी दिल्ली, 19 जून उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट के बीच करीब तीन किलोमीटर के क्षेत्र में सेन्ट्रल विस्टा परियोजना के लिये प्राधिकारियों द्वारा जमीनी स्तर पर किया गया कोई भी बदलाव उनके अपने जोखिम पर होगा।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना का भाग्य उसके फैसले पर निर्भर करेगा। इस परियोजना के दायरे में अनेक नई सरकारी इमारतें और नये संसद भवन का निर्माण प्रस्तावित है।

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न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि केन्द्र सरकार की सेन्ट्रल विस्टा परियोजना की अनुमति देने के लिये मास्टर प्लान में किसी प्रकार के बदलाव को अधिसूचित करने से पहले, दिल्ली विकास प्राधिकरण के लिये उसे इसकी जानकारी देने की आवश्यकता नहीं है।

पीठ ने कहा, ‘‘जमीनी स्तर पर किसी भी प्रकार का बदलाव वह अपने जोखिम पर करेंगे।’’

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इस याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि यह परियोजना कोई एक सप्ताह के भीतर पूरी नहीं हो रही है। इसमें बदलाव प्राधिकारी अपने जोखिम पर करेंगे।

याचिकाकर्ता की दलील थी कि परियोजना के लिये किसी भी स्थिति में जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं होना चाहिए क्योंकि इसके दायरे में आने वाले क्षेत्र में राष्ट्रीय धरोहर के अनेक स्मारक हैं जिन्हें हटाया जा सकता हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने पीठ को सूचित किया कि अभी तक भू-उपयोग में बदलाव और परियोजना के लिये पर्यावरण की मंजूरी के बारे में दो अधिसूचनाएं जारी की जा चुकी हैं।

केन्द्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस परियोजना के लिये आवश्यक मंजूरी देने में किसी भी मानदंड का उल्लंघन नहीं किया गया है।

पीठ ने इस मामले को अब सात जुलाई के लिये सूचीबद्ध कर दिया और याचिकाकर्ता को अपनी याचिका में संशोधन कर, प्राधिकारियों द्वारा इस परियोजना के लिये हाल में लिये गये फैसलों को चुनौती देने की अनुमति प्रदान कर दी।

हेगड़े ने पीठ से कहा कि इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख तक इस परियोजना के लिये कोई नयी मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि ऐसी सभी स्वीकृतियों को भी चुनौती दी जायेगी।

पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह 23 जून तक अपने कथनों और दस्तोवजों का संकलन दाखिल करे जबकि केन्द्र को इस पर तीन जुलाई तक इनका जवाब देने का निर्देश दिया गया है।

उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 28 फरवरी को एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी थी। एकल न्यायाधीश ने डीडीए से कहा था कि केन्द्र की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिये मास्टर प्लान में किसी भी प्रकार का बदलाव करने से पहले उसे अदालत के पास आना होगा।

अनूप

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