देश की खबरें | दिल्ली में लोगों में कम हुई एंटीबॉडी : सितंबर में किये गये सीरो-सर्वे के नतीजों पर विशेषज्ञों ने कहा
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, एक अक्टूबर दिल्ली में लोगों में कोविड-19 के प्रति एंटीबॉडी की मौजूदगी पर किये गये ताजा सीरो-सर्वे के मुताबिक यह पिछले सर्वेक्षण की तुलना में घटी है।

साथ ही, विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि इसका एक संभावित कारण यह हो सकता है कि शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता अपेक्षाकृत कम समय तक टिक रही हो और वायरस की घातकता में बदलाव आया हो।

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सितंबर के प्रथम सप्ताह में किये गये सर्वेक्षण के नतीजे बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को सौंपे गये। सर्वेक्षण में 17,409 लोगों के नमूने लिये गये थे।

इसमें पाया गया कि कोविड के प्रति एंटीबॉडी की सीरो-मौजूदगी सितंबर में 25 प्रतिशत घट गई, जो अगस्त में किये गये सर्वेक्षण में 29 प्रतिशत थी।

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राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के चिकित्सा निदेशक बी एल शेरवाल ने कहा कि आंकड़ों में आई कमी से यह संकेत मिलता है कि वायरस के हमले के खिलाफ प्रतिरक्षा क्षमता दो महीने या इससे अधिक समय तक नहीं टिक पा रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसका यह मतलब भी है कि काफी संख्या में लोगों के बीच प्रतिरक्षा के वांछित स्तर से हम अभी काफी पीछे हैं। आंकड़ों में आई गिरावट से यह संकेत मिलता है कि लक्षण वाले या गैर लक्षण वाले संक्रमण के प्रति प्रतिक्रिया उम्मीद किये गये समय से काफी पहले खत्म हो रही है। इसलिए लोगों को अब कहीं अधिक सावधान रहने क जरूरत है। ’’

उन्होंने कहा कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है तो जब कोविड-19 का टीका आयेगा तब मरीज को पहली खुराक के अलावा ‘अतिरिक्त खुराक’ (पावर डोज) देने की भी जरूरत पड़ेगी।

सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि इसमें शामिल किए गये और संक्रमित होने के बाद ठीक हो चुके करीब एक तिहाई रोगियों में पता लगा सकने योग्य एंटीबॉडी नहीं थी।

इसमें गया है कि हालांकि इस बारे में साक्ष्य है कि कोविड-19 के प्रति एंटीबॉडी समय बढ़ने के साथ घटती जाती है।

लोक नायक जय प्रकाश नारायण (एलएनजेपी) अस्पताल के चिकित्सा निदेशक ने भी शेरवाल के विचारों से सहमति जताते हुए कहा कि इसका मतलब है कि लोगों में पहले एंटीबॉडी थी लेकिन अब गायब हो गई।

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