देश की खबरें | मानव कोशिका प्रोटीन के बुढ़ापा रोधी कार्य की खोज की गई

नयी दिल्ली, 18 जुलाई ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने मानव कोशिकाओं के भीतर एक प्रोटीन में बुढ़ापा रोधी गुण पाया है।

विश्वविद्यालय के क्वींसलैंड मस्तिष्क संस्थान (क्यूबीआई) के शोधकर्ताओं के मुताबिक इस प्रोटीन की पहचान एटीएसएफ-1 के रूप में की गयी है, जो नए माइटोकॉन्ड्रिया के निर्माण और क्षतिग्रस्त माइटोकॉन्ड्रिया की मरम्मत के बीच बेहतर संतुलन को नियंत्रित करता है।

माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका का वह हिस्सा होता है, जो ऊर्जा के उत्पादन के लिए जिम्मेदार होता है।

क्यूबीआई में एसोसिएट प्रोफेसर स्टीवन ज़्यूरिन ने कहा, ‘‘ मानव कई ऐसी बीमारियों से पीड़ित होता है, जिसका मूल कारण माइटोकॉन्ड्रिया का सही ढंग से काम नहीं करना है। ऐसी बीमारियों में कई मानव रोगों के मूल में है, जिनमें डिमेंशिया और पार्किंसंस जैसी उम्र से संबंधित बीमारियां शामिल हैं। ’’

माइटोकॉन्ड्रिया द्वारा उत्पादित ऊर्जा जैविक कार्यों को संचालित करती है, जबकि इस प्रक्रिया के विषाक्त उप-उत्पाद कोशिका की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया में योगदान करते हैं।

स्टीवन ज़्यूरिन ने कहा, ‘‘ हमारी खोज स्वस्थ मानवों में उम्र बढ़ने और विरासत में मिली माइटोकॉन्ड्रिया संबंधी बीमारियों वाले मानवों के जीवन पर रोमांचक प्रभाव डाल सकती है। तनाव की स्थिति में, जब माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए क्षतिग्रस्त हो जाता है, एटीएसएफ-1 प्रोटीन कोशिका मरम्मत को प्राथमिकता देता है, जो कोशिका के स्वास्थ्य और उसके अधिक समय तक जीवित रहने को बढ़ावा देता है। ’’

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