देश की खबरें | रैन बसेरों में भोजन देने संबंधी याचिका पर जवाब दें या जुर्माना भुगतें : अदालत ने केन्द्र से कहा
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 29 जुलाई बार-बार कहने के बावजूद जनहित याचिका पर जवाब दायर नहीं करने को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को केन्द्र को फटकार लगाते हुए चेतावनी दी कि असफल रहने पर उसपर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।

उक्त जनहित याचिका में दावा किया गया है कि दिल्ली के रैन बसेरों में रहने वालों को दिन का तीन वक्त का भोजन भी नहीं दिया जा रहा है।

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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने आवासन मंत्रालय को अपना हलफनामा दायर करने का एक और मौका देते हुए कहा कि ऐसा करने में असफल रहने पर आवासन मंत्रालय के सचिव पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।

अदालत ने यह भी कहा कि आवासन मंत्रालय के सचिव पर इसी साल पहले भी 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था जब उन्होंने अवैध तरीके से कब्जाये गए सरकारी आवासों के संबंध में उचित जानकारी नहीं दी थी।

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अदालत ने हालांकि बाद में जुर्माना माफ कर दिया था क्योंकि मंत्रालय ने एक अर्जी देकर जो हुआ उसके लिए माफी मांगी थी और अवैध तरीके से कब्जा किए गए आवासों, उनके खिलाफ की गई कार्रवाई और अवैध तरीके से कब्जा करने वालों से वसूली गयी राशि के बारे में विस्तृत जानकारी मुहैया करायी थी।

एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मंत्रालय से कहा था कि वह एक हलफनामा दायर कर बताए कि दिल्ली के रैन बसेरों में रहने वालों को तीन वक्त को भोजन उपलब्ध कराने के लिए उसने दिल्ली सरकार को कितना धन दिया है।

बुधवार को मंत्रालय के अधिवक्ता ने हलफनामा दायर करने के लिए और वक्त मांगा, जिससे पीठ नाराज हो गयी।

हालांकि, दिल्ली सरकार की अधिवक्ता ने बताया कि उनके पास रैन बसेरों में रहने वालों को भोजन देने के लिए केन्द्र की ओर से धन मिलने की कोई सूचना नहीं है।

साथ ही उन्होंने बताया कि रैन बसेरों में रहने वालों को सिर्फ 31 जुलाई तक ही भोजन मुहैया कराया जाएगा।

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