विदेश की खबरें | पशु चेतना : क्यों यह समय हमारे मानव-केंद्रित दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने का है
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

कैम्ब्रिज (इंग्लैंड), 19 अप्रैल (द कन्वरसेशन) हम पालतू जानवरों के साथ का आनंद जी भर कर ले सकते हैं, हालांकि, बहुत से लोग मानते हैं कि हम जिस दुनिया में रहते हैं, उसके बारे में मनुष्यों की चेतना कहीं बेहतर है।

हालांकि, समय-समय पर अन्य जानवरों की आश्चर्यजनक बुद्धिमत्ता के बारे में नए अध्ययन के निष्कर्षों ने इसे लेकर नयी बहस छेड़ दी है।

हाल ही में, दो जर्मन दार्शनिकों प्रोफेसर लियोनार्ड डंग और पीएचडी शोधार्थी अल्बर्ट न्यूवेन ने एक लेख प्रकाशित किया था जिसमें सवाल किया गया था कि क्या हम इस मुद्दे को सही कोण से ले रहे हैं अथवा यहां तक ​​कि सही सवाल भी पूछ रहे हैं या नहीं?

लेख में लेखकों का कहना है कि हमें पशु चेतना को ‘‘क्या वे करते हैं/ क्या वे नहीं करते हैं?’’, इस दृष्टिकोण से लेना बंद कर देना चाहिए। बल्कि, वे सुझाव देते हैं कि हमें मानवीय चेतना के साथ-साथ अमानवीय चेतना को एक मानदंड से मापना चाहिए।

अपने शोध में, मैंने यह पता लगाया है कि क्या हमें मनुष्यों के साथ अन्य पशुओं की तुलना करने की कोशिश करना बंद कर देना चाहिए, जो कि बेहतर व्यवहार के ‘‘योग्य’’ हैं।

मेरा दृष्टिकोण पशु चेतना के अध्ययन का विरोध नहीं करता है, बस यह लोगों से उन कारणों पर विचार करने के लिए कहता है कि हम ये प्रश्न क्यों पूछ रहे हैं।

चेतना के और भी रूप हो सकते हैं जिन्हें हम समझ नहीं सकते। पशुओं का मानव चेतना से सटीक संबंध, उन्हें कम महत्वपूर्ण नहीं बनाता है।

एक अलग दृष्टिकोण :

हम अभी भी नहीं जानते कि जीवित होने और चेतना होने में क्या अंतर है। मनुष्यों में, चेतना की परि अस्पष्ट है। उदाहरण के लिए, ‘ग्लासगो कोमा स्केल’ इस उम्मीद को मापता है कि रोगी के अपनी उपस्थिति को परिभाषित करने के बजाय, चेतना वापस प्राप्त करने की कितनी संभावना है।

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