देश की खबरें | इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर लगायी रोक
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर की पीठ ने कई याचियों की याचिका पर एक साथ सुनवाई करके पारित किया। अदालत ने एक जून को अपना आदेश सुरक्षित किया था जिसे आज सुनाया। अगली सुनवाई 12 जुलाई को होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर की पीठ ने कई याचियों की याचिका पर एक साथ सुनवाई करके पारित किया। अदालत ने एक जून को अपना आदेश सुरक्षित किया था जिसे आज सुनाया। अगली सुनवाई 12 जुलाई को होगी।
इससे कुछ दिन पूर्व उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर उप्र सरकार का जवाब मांगा था। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में इन पदों पर नियुक्तियों के लिए ऊंची कट आफ रखने के राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा था।
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याचियों ने घोषित परीक्षा परिणाम में कुछ प्रश्नों की सत्यता पर प्रश्न उठाया था।
अदालत ने याचियों को विवादित प्रश्नों पर आपत्तियों को एक सप्ताह के भीतर राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। आपत्तियों को सरकार यूजीसी को प्रेषित करेगी व यूजीसी आपत्तियों का निस्तारण करेगी।
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राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह एवं अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता रणविजय सिंह ने पक्ष रखा था जबकि विभिन्न याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एल पी मिश्र, एच जी एस परिहार, सुदीप सेठ आदि ने पक्ष रखा।
गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने 21 मई को राज्य सरकार से कहा था कि वह रिक्त स्थानों का विवरण और नियुक्तियों के लिये अपनाई गयी प्रक्रिया को सिलसिलेवार तरीके से एक चार्ट के माध्यम से स्पष्ट करे ।
शीर्ष अदालत की न्यायमूर्ति उदय यू ललित, न्यायमूर्ति एम एम शांतानागौदर और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ हालांकि शुरू में उच्च न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती थी लेकिन बाद में उसने अपने आदेश में सुधार करके उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया और सुनवाई की अगली तारीख छह जुलाई निर्धारित की ।
पीठ ने इसके साथ ही उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र एसोसिएशन तथा अन्य की याचिकाओं को इसके बाद छह जुलाई के लिये सूचीबद्ध कर दिया। पीठ ने राज्य सरकार से यह भी जानना चाहा है कि इस परीक्षा के निर्धारित सामान्य श्रेणी के लिये 45 प्रतिशत अंक और आरक्षित वर्ग के लिये 40 प्रतिशत अंकों के कट ऑफ आधार में उसने बदलाव क्यों किया।
उप्र प्राथमिक शिक्षा मित्र और कई अन्य लोगों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के छह मई के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील दायर की हैं।
छह मई के अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह 69,000 सहायक बेसिक अध्यापकों की भर्ती की प्रक्रिया अगले तीन महीने के भीतर पूरा करे।
खंड पीठ ने इससे पूर्व एकल पीठ के आदेश को दरकिनार कर दिया था जिसमें सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया गया था जिसमें सामान्य श्रेणी के लिए 65 फीसदी और आरक्षित श्रेणी के लिए 60 फीसदी अहर्ता अंक रखे गए थे ।
एकल पीठ ने कहा था कि सामान्य श्रेणी के लिए न्यूनतम कट आफ 45 फीसदी और आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम कट आफ 40 फीसदी रहेगी।
25 जुलाई 2017 को शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से कहा था कि वह अध्यापक योग्यता परीक्षा : टीईटी : के जरिए की गयी 1,37,517 भर्तियों को रद्द करे लेकिन भर्ती प्रक्रिया में अनुभव का लाभ दे ।
छह महीने बाद सरकार ने 69,000 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए पहली बार लिखित परीक्षा का आदेश जारी किया था।
सं जफर
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