देश की खबरें | छत्तीसगढ़ में कोविड-19 को लेकर सभी संभव कदम उठाये जा रहे हैं: बघेल
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

रायपुर, 13 सितम्बर छत्तीसगढ़ में कोविड-19 के मामलों में लगातार वृद्धि के बीच राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार को कहा कि राज्य में रोगियों के उपचार और संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए सभी संभव उपाय किए जा रहे हैं।

यहां जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार बघेल ने अपने मासिक रेडियो संबोधन कार्यक्रम ‘लोकवाणी’ के दसवें संस्करण में ‘समावेशी विकास- आपकी आस’ विषय पर भी बात की। उन्होंने कहा गया कि समावेशी विकास राज्य और देश के सामाजिक-आर्थिक समस्या का एकमात्र समाधान है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने कोविड-19 की अपनी जांच क्षमता में पिछले कुछ महीनों में काफी बढ़ोतरी की है।

बघेल ने कहा, ‘‘इस वर्ष मार्च में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर में ही कोविड-19 जांच की सुविधा थी और जांच सुविधाओं का विस्तार करना एक बड़ी चुनौती थी।’’

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वर्तमान में राज्य में सभी छह राजकीय मेडिकल कालेजों और चार निजी प्रयोगशालाओं में आरटी-पीसीआर जांच की सुविधा है।

उन्होंने कहा कि सभी सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और 28 जिला अस्पतालों में रेपिड एंटीजन जांच के लिए व्यवस्था की गई है जबकि ट्रूनैट जांच 30 प्रयोगशालाओं में की जा रही है।

उन्होंने कहा कि इसी तरह से शुरुआत में कोरोना वायरस का इलाज केवन एम्स रायपुर में उपलब्ध था लेकिन राज्य सरकार ने अब पूरे राज्य में 29 सरकारी अस्पताल, 29 समर्पित कोविड अस्पताल और 186 कोविड देखभाल केंद्र स्थापित किये हैं।

इसके साथ ही 19 निजी अस्पतालों को भी कोविड-19 के इलाज की मान्यता दी गई है।

उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में पहले आपातकालीन मामलों के लिए 148 वेंटिलेटर थे, जो अब बढ़कर 331 हो गए हैं। उन्होंने कहा कि ‘‘वायरल संक्रमण की रोकथाम और रोगियों के उपचार के लिए सभी संभव उपाय किए जा रहे हैं।’’

शनिवार तक, राज्य में कोविड-19 के 61,763 मामले आये थे और इनमें से 33,246 मामले उपचाराधीन जबकि 27,978 लोग ठीक हो चुके हैं और 539 की मौत हो गई है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार शनिवार तक की स्थिति के अनुसार छत्तीसगढ़ उपचाराधीन मामलों के मामले में देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छठे स्थान पर रहा।

मुख्यमंत्री ने ‘समावेशी विकास-आपकी आस' पर अपने विचार साझा करते हुए कहा, ‘‘मेरा दृढ़ विश्वास है कि देश और राज्य की आर्थिक और सामाजिक समस्याओं को केवल समावेशी विकास के माध्यम से हल किया जा सकता है।’’

उन्होंने अर्थव्यवस्था में किसानों, ग्रामीणों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, पिछड़े वर्गों और महिलाओं की भागीदारी के महत्व को भी रेखांकित किया।

उन्होंने कहा, ‘‘हम समावेशी विकास तभी प्राप्त कर सकते हैं जब हम किसानों को अर्थव्यवस्था की धुरी मानें। छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों को अर्थव्यवस्था के केंद्र में रखा है। इसके अलावा, राज्य सरकार किसानों, ग्रामीणों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, पिछड़े वर्गों और महिलाओं की अर्थव्यवस्था में भागीदारी बढ़ाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है।’’

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