मुंबई, 17 मई महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने महिला आरक्षण विधेयक पारित कराने के लिए अपने चाचा एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) प्रमुख शरद पवार की शनिवार को प्रशंसा की, जिसमें स्थानीय निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया था।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पुणे में एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘उस समय साहेब (शरद पवार) मुख्यमंत्री थे और विधायक के तौर पर वह मेरा पहला कार्यकाल था। उन्होंने कहा कि विधेयक पारित होने तक सदन को स्थगित नहीं किया जाना चाहिए। हमने बहस के बाद सुबह साढ़े तीन बजे विधेयक पारित किया था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगर एक महिला अपने घर और बच्चों का प्रबंधन कर सकती है, तो वह एक गांव या नगर परिषद का भी प्रबंधन कर सकती है। ऐसा उनका (अपने आप पर) विश्वास है। इसीलिए इस तरह का आरक्षण प्रदान किया गया। जो देश महिलाओं का सम्मान करते हैं, वे प्रगति करते हैं।’’
उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने यह भी कहा कि लड़कियां आज "लड़कों से प्रभावित हुए बिना" हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पहले के समय में लड़कियों को शिक्षा के अवसर नहीं मिलते थे। हालांकि, महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले ने पुणे में लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला, जिससे उन्हें शिक्षा सुलभ हुई। तब से शुरू हुई यात्रा हमें आज इस मुकाम पर ले आई है।’’
अजित पवार ने कहा कि राज्य सरकार ने भिड़े वाडा को अपने नियंत्रण में ले लिया है, जहां यह स्कूल शुरू किया गया था और इस महान दंपति के सम्मान में एक विशाल स्मारक बनाने का काम जारी है।
अजित पवार द्वारा यह प्रशंसा ऐसे समय की गई है, जब शरद पवार और अजित पवार के नेतृत्व वाले गुटों के संभावित विलय की अटकलें जारी हैं।
शरद पवार द्वारा स्थापित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) जुलाई 2023 में विभाजित हो गई थी, जब उनके भतीजे अजित पवार अलग होकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में शामिल हो गए थे। हालांकि, बाद में उन्हें मूल पार्टी का नाम और उसका चिह्न मिल गया था, वहीं शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट को राकांपा (शरद चंद्र पवार) के रूप में जाना जाने लगा।
दोनों गुटों ने विलय की बात को अटकलबाजी बताया है।
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