देश की खबरें | अजित पवार एवं अन्य नेताओं ने कोरेगांव भीमा युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि दी
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

पुणे, एक जनवरी महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार और कुछ अन्य नेताओं ने कोरेगांव भीमा युद्ध की 203वीं बरसी पर शुक्रवार को पुणे के निकट ‘जय स्तंभ’ पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख, ऊर्जा मंत्री डॉक्टर नितिन राउत समेत अन्य नेताओं ने स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह स्मारक पुणे-अहमदनगर रोड पर पेरना गांव के पास है।

वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने भी जय स्तंभ पर आकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर अजित पवार ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर लोगों से अपील की है कि वे स्मारक पर न आएं और घर में रहकर श्रद्धांजलि दें।

‘जय स्तंभ’ पर हर साल लाखों लोग इस युद्ध की बरसी पर श्रद्धांजलि देने के लिए जुटते हैं। यह लड़ाई एक जनवरी,1818 को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठा शासकों के पेशवा योद्धाओं के बीच हुई थी।

हालांकि, इस साल कोविड-19 की वजह से जिला प्रशासन और भीमा कोरेगांव विजयस्तंभ शौर्य दिन समन्वय समिति ने लोगों से अपील की है कि वे स्मारक पर आने से बचें और घर पर ही रहकर श्रद्धांजलि अर्पित करें।

जिला प्रशासन ने सीआरपीसी की धारा 144 लगा दी है, जिसके तहत पेरना और अन्य गांवों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध है। हालांकि विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक पार्टियों के गणमान्य नेताओं को यहां आने और श्रद्धांजलि अर्पित करने की अनुमति दी गई है।

जय स्तंभ पर श्रद्धांजलि देने के बाद प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि एक जनवरी ‘सामाजिक बंधनों’ से मुक्त होने का दिन है। उन्होंने कहा, ‘‘यह लड़ाई (कोरेगांव भीमा युद्ध) पेशवा शासन के दौरान अस्पृश्यता के खिलाफ थी और इसमें सफलता मिली।’’

उन्होंने कहा कि सामाजिक आंदोलन आज भी चल रहे हैं और इस कार्यक्रम की महत्ता सही मायने में लोकतंत्र बहाल होने तक कायम रहेगी। आंबेडकर ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें, दोनों के पास अर्थव्यवस्था को बेहतर करने की योजना नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर उनके पास अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए ठोस योजना होती तो कोविड-19 महामारी के कारण मौजूदा स्थिति से हम अच्छी तरह निपट पाते।’’

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने भी जय स्तंभ पर श्रद्धांजलि दी। आठवले ने कहा कि वह पाठ्यपुस्तकों में कोरेगांव भीमा युद्ध के इतिहास को शामिल करवाने के लिए शिक्षा मंत्री को पत्र लिखेंगे।

एक जनवरी, 2018 को युद्ध की 200वीं बरसी पर गांव के आसपास हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।

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