विदेश की खबरें | विमान दुर्घटना से संबंधित मुकदमे में एयरबस और एयर फ्रांस हत्या के आरोपों से बरी
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

इस दुर्घटना में 228 लोग मारे गए थे। इस हादसे के बाद विमान सुरक्षा उपायों में स्थायी परिवर्तन हुए।

न्यायाधीशों द्वारा फैसला पढ़कर सुनाए जाते ही अदालत कक्ष में मौजूद पीड़ित परिवारों के सदस्य अपने आंसू नहीं रोक सके जिन्होंने 13 सालों तक इस बात के लिये संघर्ष किया कि मामला अदालत तक पहुंचे।

तीन न्यायाधीशों के पैनल ने फैसला सुनाया कि कंपनियों के फैसलों और दुर्घटना के बीच सीधे संबंध स्थापित करने के पर्याप्त सबूत नहीं थे। आधिकारिक जांच में पाया गया कि कई कारकों ने दुर्घटना में योगदान दिया, जिसमें पायलट की त्रुटि और पिटोट ट्यूब कहे जाने वाले बाहरी सेंसर का ‘आइसिंग ओवर’ शामिल है।

पिटोट ट्यूब के आइसिंग ओवर से संकेतित गति प्रभावित हो सकती है।

दो महीने तक चले मुकदमे के फैसले ने पीड़ित परिवारों को गुस्से और निराशा से भर दिया। असामान्य रूप से, यहां तक कि सरकारी वकीलों ने भी यह करते हुए कंपनियों को बरी किए जाने के लिए तर्क दिया कि कार्यवाही ने कंपनियों द्वारा आपराधिक गलत काम करने के पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए।

अभियोजकों ने मुख्य रूप से हादसे की जिम्मेदारी इस दौरान मारे गए पायलटों पर डाल दी। एयरबस के वकीलों ने भी पायलट की गलती को जिम्मेदार ठहराया और एयर फ़्रांस ने कहा कि दुर्घटना के पूरे कारणों का कभी पता नहीं चलेगा।

एयरबस और एयरफ्रांस को सजा होती तो उप पर 2.25 लाख यूरो का जुर्माना लग सकता था।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)