देश की खबरें | ओडिशा में हुए हादसे की खबर आने के बाद बंगाल के गांव में पसरा सन्नाटा

उदयनारायणपुर (पश्चिम बंगाल), 25 मई बंगाल के एक गांव के छोटे किसानों और कारखाने के श्रमिकों के परिवारों ने कई सालों तक किसी तरह बचत कर ओडिशा और आंध्र प्रदेश के अपने दौरे के लिये रकम जुटाई थी। वे सालों से जिस सफर का इंतजार कर रहे थे वह उनमें से कुछ के लिये जिंदगी का आखिरी सफर साबित हुआ।

उन्हें विशाखापट्टनम ले जा रही बस मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात ओडिशा के गंजाम और कंधमाल जिलों के बीच सीमावर्ती इलाके में पलट गई। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई और 40 अन्य घायल हो गए।

दुर्घटना में जान गंवाने वाले ग्रामीणों के शव बृहस्पतिवार को यहां पहुंचने की उम्मीद है। अधिकतर घायल इलाज के लिए गंजाम के सरकारी अस्पतालों में ही रहेंगे। घायलों में से पंद्रह की हालत गंभीर है।

जैसे ही दुर्घटना की खबर गांव में पहुंची और टीवी समाचार चैनलों ने दुर्घटना के दृश्य दिखाए, हावड़ा जिले के उदयनारायणपुर ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित सुल्तानपुर में एक भयानक सन्नाटा छा गया। शोर सिर्फ हादसे में जान गंवाने वालों के करीबी रिश्तेदारों के विलाप का था। हादसे की खबर के बाद पूरे गांव में रसोई बंद रही।

ग्रामीणों ने बताया कि 60 लोगों को लेकर एक पर्यटक बस 23 मई को ओडिशा के फूलबनी जिले के दरिंगबाड़ी के लिए सुल्तानपुर से रवाना हुई थी। 24 मई को वे रात के खाने के बाद ओडिशा के कंधमाल जिले के दरिंगबाड़ी से विशाखापत्तनम के रेतीले समुद्र तटों के लिए रवाना हुए थे।

दुर्घटनाग्रस्त बस में सवार पर्यटकों में शामिल बिकाश देनरे ने ओडिशा के भंजनगर से फोन पर बताया कि वाहन रात करीब एक बजे बिजली के एक खंभे से टकराकर पलट गया।

देनरे ने कहा कि वह चालक के पीछे दो सीट छोड़कर बैठे थे। रात का समय होने के कारण बस में सवार अधिकांश लोग सो रहे थे।

स्थानीय लोग और पुलिस कुछ देर बाद पहुंचे तथा मृतकों व घायलों को निकालने की प्रक्रिया शुरू की।

इस हादसे में एक परिवार ने चार सदस्यों में से दो को खो दिया। मौसमी देनरे और उनकी 22 वर्षीय बेटी रीमा की इस हादसे में मौत हो गई। रीमा की छह महीने में शादी होनी थी। उनका घर खाली और वीरान पड़ा है क्योंकि हादसे में जीवित बचे रीमा के पिता और उसकी छोटी बहन का गंजाम में इलाज चल रहा है।

एक परिजन ने बताया कि दंपती की विवाहित बड़ी बेटी इस यात्रा पर नहीं गई थी।

हादसे ने 34 वर्षीय बरनाली मन्ना की भी जान ले ली। बरनाली के अपनी तीन साल की बेटी और पति के साथ यात्रा पर जाने से पहले अपनी आखिरी मुलाकात को याद करते हुए उसकी भाभी कबीता मन्ना रो पड़ीं।

आंखों में आंसू लिए कविता ने कहा, “दीदी की मौत निस्संदेह एक त्रासदी है। लेकिन इससे भी बुरी खबर यह है कि दुर्घटना के कारण बच्चे का एक पैर काटना पड़ेगा। मैं बहुत दुखी हूं।”

स्थानीय लोगों ने कहा कि जो परिवार यात्रा पर गए थे, वे अपनी यात्रा की व्यवस्था करने के लिए एक स्थानीय ट्रैवल क्लब को मासिक सदस्यता का भुगतान करते थे। इस तरह का एक बड़ा आयोजन कई वर्षों के बाद होता था क्योंकि उन्हें इसके लिए अधिक धन जमा करने की आवश्यकता होती थी।

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