देश की खबरें | अभिनेत्री को सुरक्षा तो फिर हाथरस पीड़िता के परिजनों को क्यों नहीं: शिवसेना
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. शिवसेना ने मंगलवार को पूछा कि जब केंद्र सरकार मुंबई की एक अभिनेत्री को ‘वाई-प्लस’ सुरक्षा दे सकती है तो हाथरस की दलित पीड़िता के परिवार को क्यों सुरक्षा नहीं मुहैया कराई जा सकती है। यह रवैया डॉक्टर बी आर आंबेडकर के संविधान में सबके साथ समान व्यवहार के सिद्धांत से मेल नहीं खाता है।
मुंबई, छह अक्टूबर शिवसेना ने मंगलवार को पूछा कि जब केंद्र सरकार मुंबई की एक अभिनेत्री को ‘वाई-प्लस’ सुरक्षा दे सकती है तो हाथरस की दलित पीड़िता के परिवार को क्यों सुरक्षा नहीं मुहैया कराई जा सकती है। यह रवैया डॉक्टर बी आर आंबेडकर के संविधान में सबके साथ समान व्यवहार के सिद्धांत से मेल नहीं खाता है।
शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में कहा गया है कि हाथरस पीड़िता के परिवार को ‘जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, वे डर में जी रहे हैं। कथित सामूहिक दुष्कर्म के बाद पीड़िता की मौत हो गई थी। सामना में पूछा गया है कि अगर पीड़ित परिवार के लिए वाई-प्लस श्रेणी की सुरक्षा मांगी गई है तो इसमें गलत क्या है।
पिछले महीने अभिनेत्री कंगना रनौत को वाई-प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी, क्योंकि एक विवाद के बाद उन्होंने कहा था कि उन्हें मुंबई पुलिस से डर लगता है।
सामना में कहा गया, ‘‘ केंद्र सरकार ने मुंबई की एक अभिनेत्री को वाई-प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी, लेकिन हाथरस सामूहिक-दुष्कर्म की पीड़िता के परिवार को कोई सुरक्षा नहीं मिली। यह समान न्याय के सिद्धांत से मेल नहीं खाता है। यह डॉक्टर आंबेडकर के संविधान के तहत न्याय नहीं है।’’
यह भी पढ़े | West Bengal: बंगाल में भाजपा नेता की हत्या के मामले में CID ने दो लोगों को किया गिरफ्तार.
सामना में कहा गया, ‘‘ हाथरस कांड ने आडंबर रचने वाले कई लोगों के चेहरे से नकाब हटा दिया।’’
सामना में कहा गया कि उत्तर प्रदेश सरकार की सीबीआई जांच की सिफारिश पर भी सवाल खड़े होते हैं क्योंकि पीड़िता के परिवार ने इस संबंध में न्यायिक जांच की मांग की है।
हाथरस मामले में सीबीआई जांच पर आश्चर्य जताते हुए संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि उप्र सरकार ने पीड़िता का अंतिम संस्कार करके ‘सबूतों को नष्ट’ कर दिया है।
सामना में आरोप लगाया गया है, ‘‘ क्या हाथरस की पुलिस ने ऊपर से बिना पूछे ही ऐसा कर दिया? यह सब सहमति से किया गया है।’’
सामना में कहा गया है कि जिन लोगों ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में महाराष्ट्र को ‘बदनाम’ करने की कोशिश की, वह हाथरस प्रकरण की वजह से खुद ही अपने खोदे गए गड्ढे में गिर गए हैं।
मराठी में प्रकाशित अखबार के संपादकीय में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश मंत्री परिषद के सभी मंत्रियों को हाथरस पीड़िता के परिवार से मिलना चाहिए।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 06, 2020 04:21 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

