नयी दिल्ली, 11 अगस्त संसद की एक समिति ने स्वास्थ्य मंत्रालय से कहा है कि आंतरिक रोगियों के ‘‘कैशलेस’’ उपचार के लिए लाभार्थियों को भर्ती करने से इनकार करने पर सीजीएचएस के साथ सूचीबद्ध अस्पतालों के खिलाफ त्वरित दंडात्मक कार्रवाई शुरू की जाए।
राज्यसभा सदस्य सुजीत कुमार की अध्यक्षता वाली याचिका संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में प्रस्तुत ‘केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों के लिए व्यापक चिकित्सा सुविधाओं की प्रार्थना’ करते हुए की गयी याचिका पर अपनी 162वीं रिपोर्ट में यह बात कही।
समिति ने कहा कि बड़ी संख्या में लाभार्थियों, विशेष रूप से पेंशनभोगियों को प्रभावित करने वाला प्रमुख मुद्दा पैनल में शामिल निजी अस्पतालों द्वारा केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) लाभार्थियों को कैशलेस आधार पर आंतरिक उपचार के लिए भर्ती करने से इनकार करना है।
रिपोर्ट के अनुसार समिति को कई बार सूचित किया गया है कि बिस्तर की कथित अनुपलब्धता के नाम पर लाभार्थी को भर्ती नहीं किया जाता है।
उसने कहा, ‘‘हालांकि, नकदी जमा करने पर अचानक से बिस्तर उपलब्ध हो जाता है।’’
समिति ने कहा कि उसे हितधारकों ने यह भी सूचित किया है कि सीजीएचएस के पैनल में सूचीबद्ध अनेक अस्पताल और चिकित्सा केंद्र 2014 की सीजीएचएस दरों का पालन नहीं कर रहे और लाभार्थियों से अतिरिक्त राशि वसूल रहे हैं।
समिति ने मंत्रालय से कहा कि इस तरह की शिकायतों पर दोषी अस्पतालों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई हो।
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