विदेश की खबरें | अगवा किए गए पाकिस्तान के पत्रकार सुरक्षित घर लौटे, शीर्ष अदालत ने पुलिस से मांगी रिपोर्ट

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(सज्जाद हुसैन)

इस्लामाबाद, 22 जुलाई पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने जाने-माने पत्रकार मतीउल्लाह जान को अगवा किए जाने के मामले में इस्लामाबाद पुलिस प्रमुख को रिपोर्ट दायर करने के लिये दो सप्ताह का समय दिया है। जान को अगवा किए जाने पर देशभर में आक्रोश फैलने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

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सरकार और देश के सुरक्षा संस्थानों के मुखर आलोचक जान को इस्लामाबाद में सादे कपड़े और वर्दी पहने लोगों ने मंगलवार को अगवा करने के कुछ ही घंटे बाद छोड़ दिया था।

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश गुलजार अहमद की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ जान के खिलाफ चल रहे अदालत की कथित अवमानना के मामले की सुनवाई कर रही है। इस पीठ ने उन्हें अगवा किये जाने के मामले पर ध्यान दिया।

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न्यायमूर्ति गुलजार ने इस्लामाबाद पुलिस प्रमुख को अगली सुनवाई के दौरान पेश होने का निर्देश देते हुए सवाल किया कि अपहरणकर्ताओं द्वारा छोड़े जाने के घंटों बाद भी पुलिस ने पत्रकार का बयान दर्ज क्यों नहीं किया।

उन्होंने अटॉर्नी जनरल से पूछा, ''संस्थाएं क्या कर रही हैं?''

पाकिस्तान बार काउंसिल के प्रतिनिधियों और पत्रकारों ने सुनवाई में शिरकत की।

जान के भाई शाहिद अब्बासी ने मीडिया को बताया कि जान अपने एक कथित विवादित ट्वीट को लेकर चल रहे अदालत की अवमानना मामले में उच्चतम न्यायालय के सामने पेश होने की तैयारी कर रहे थे।

अब्बासी ने बताया कि उन्हें एक अज्ञात नंबर से फोन आया कि वह जान को पंजाब प्रांत के अटक जिले के फतेह जंग इलाके से ले जाएं। यह जगह इस्लामाबाद से बहुत दूर नहीं है।

जान ने बुधवार को ट्वीट किया, ‘‘मैं सुरक्षित घर लौट आया हूं। अल्लाह मेरे और मेरे परिवार पर बहुत मेहरबान रहा है। मैं अपने मित्रों, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पत्रकार समुदाय, राजनीतिक दलों, सोशल मीडिया एवं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों और न्यायपालिका का शुक्रिया अदा करता हूं, जिनकी त्वरित कार्रवाई से यह संभव हो सका।’’

अब्बासी ने बताया कि जान को मंगलवार को अगवा करने के बाद आंखों पर पट्टी बांधकर रखा गया और उन्हें अधिकतर समय कार में ही रखा गया।

जान को अगवा करने की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है, लेकिन एक वीडियो में पता चला है कि सादे कपड़े और वर्दी पहने करीब छह लोगों ने जान को उनकी कार से खींचकर एक अन्य वाहन में बैठा दिया।

इस घटना पर मीडिया, मानवाधिकार समूहों, नेताओं और राजनयिक समुदाय ने कड़ी नाराजगी जताई थी और पत्रकार को सुरक्षित छोड़े जाने की मांग की थी।

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