देश की खबरें | अपनी बच्ची की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा भुगत रही महिला को उच्चतम न्यायालय से जमानत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. अपनी डेढ़ वर्ष की बच्ची को कुएं में फेंक कर मार डालने के मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रही एक अनाथ महिला को उच्चतम न्यायालय ने जमानत दे दी और सजा के खिलाफ उसकी अपील को वापस उच्च न्यायालय के पास भेज दिया।

नयी दिल्ली, 12 जुलाई अपनी डेढ़ वर्ष की बच्ची को कुएं में फेंक कर मार डालने के मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रही एक अनाथ महिला को उच्चतम न्यायालय ने जमानत दे दी और सजा के खिलाफ उसकी अपील को वापस उच्च न्यायालय के पास भेज दिया।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय सजायाफ्ता को सुने बगैर उसे दोषी ठहराने और सजा के खिलाफ अपील को खारिज नहीं कर सकता और इसे इसके गुण-दोष पर विचार किया जाना है भले ही याचिकाकर्ता या उसका वकील अदालत में मौजूद हों अथवा नहीं।

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न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन, न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की पीठ ने अपने हाल के आदेश में कहा, ‘‘इसलिए हम 22 अप्रैल 2014 के फैसले और आदेश को दरकिनार करते हैं और मामले का निस्तारण गुण-दोष के आधार पर करने के लिए वापस भेजते हैं। इस बीच यह देखते हुए कि याचिकाकर्ता करीब 11 वर्षों से जेल में बंद है, हम निचली अदालत की संतुष्टि की शर्त पर उसे जमानत देते हैं।’’

महिला याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वकील थॉमस फ्रैंकलिन सीजर ने मद्रास उच्च न्यायालय के मदुरई पीठ के 22 अप्रैल 2014 के फैसले को चुनौती दी। अदालत ने इस आधार पर हत्या के आरोप में दोषी ठहराने की अपील को खारिज कर दिया कि मामले में जिरह के लिए महिला का वकील पेश नहीं हुआ।

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महिला को तिरूचिरापल्ली की सत्र अदालत ने उसके पति की शिकायत के आधार पर दर्ज मामले में 31 मार्च 2004 को हत्या के आरोप में दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

वह वर्तमान में त्रिची महिला कारागार में बंद है और कई बीमारियों से पीड़ित है।

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