पुणे, 27 अगस्त महाराष्ट्र के पुणे में, ऑक्सफॉर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित कोविड-19 टीका लगवाने वाले 48 वर्षीय व्यक्ति ने कहा कि वह कोरोना वायरस के खिलाफ वैश्विक जंग का हिस्सा बनकर खुश हैं।
दरअसल, ऑक्सफॉर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित टीके का बुधवार को यहां भारतीय विद्यापीठ मेडिकल कॉलेज में दूसरे चरण का नैदानिक परीक्षण शुरु हो गया। इस दौरान दो स्वयंसेवकों को 'कोविड शील्ड' नामक यह टीका लगाया गया। टीका लगवाने वालों में पेशे से एक डॉक्टर भी शामिल है।
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पुणे स्थित भारतीय सीरम संस्थान इस टीके का निर्माण कर रहा है।
टीका लगवाने वाले डॉक्टर ने बृहस्पतिवार को बताया कि उन्होंने दस साल पहले एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) वायरस के खिलाफ एक टीके के नैदानिक परीक्षणों में भी हिस्सा लिया था।
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उन्होंने कहा कि उनकी 21 वर्षीय बेटी ने भी 2014 में सर्वाइकल कैंसर के टीके के परीक्षण में हिस्सा लिया था।
डॉक्टर ने कहा, ''बी-टेक की पढ़ाई कर रही मेरी बेटी ने भी इसमें टीका लगवाने की इच्छा जतायी थी क्योंकि उसकी कोविड-19 और एंटीबॉडी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई थी।''
उन्होंने कहा कि खुश होने से अधिक उन्हें इस बात को लेकर अच्छा महसूस हो रहा है कि उन्होंने और उनकी बेटी ने टीका लगवाकर कोविड-19 के खिलाफ जंग में छोटा सा योगदान दिया है। यह मानव जाति के लिए एक बड़ा और वैश्विक प्रयास है।''
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