नयी दिल्ली, 18 दिसंबर यकृत (लीवर) की गंभीर बीमारी से पीड़ित 52 वर्षीय एक व्यक्ति को यहां दिल्ली के एक अस्पताल में प्लाज्मा बदलने के बाद नया जीवन मिला। अस्पताल के चिकित्सकों ने रविवार को यह जानकारी दी।
दो सप्ताह तक पीलिया के लक्षणों का अनुभव करने के बाद व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
सर गंगा राम अस्पताल (एसजीआरएच) ने एक बयान में कहा कि मरीज को जलोदर (पेट में द्रव का संचय) और मूत्र संबंधी परेशानियां भी हो गयीं थीं।
अस्पताल ने कहा, ‘‘ आगे की जांच में, उन्हें हेपेटाइटिस-बी वायरस से संक्रमित पाया गया, और एक्यूट-ऑन-क्रॉनिक लिवर फेल्योर (एसीएलएफ) का निदान किया गया था। ’’
अस्पताल के मुताबिक डायलिसिस पर विचार किया गया और रोगी को लीवर प्रत्यारोपण का विकल्प दिया गया क्योंकि उसके स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक मानदंडों के मुताबिक उसके एक महीने तक जीवित रहने की 50 प्रतिशत संभावना थी।
एसजीआरएच में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ पीयूष रंजन ने कहा, ‘‘ चूंकि, परिवार में कोई डोनर नहीं था, इसलिए हमने प्लाज्मा बदलने की प्रक्रिया (प्लेक्स) के एक असामान्य विकल्प की पेशकश की। हमने उसके लिए प्लेक्स के कुल पांच सत्र आयोजित किए। दूसरे सत्र के बाद, उनके पीलिया में सुधार होने लगा, उनकी चेतना में सुधार हुआ और उनके गुर्दों ने भी थोड़ा काम करना शुरू किया। ’’
डॉ पीयूष रंजन ने कहा, ‘‘ रोगी का अन्य चिकित्सा संबंधी उपचार भी जारी रखा गया था, जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण एंटी-वायरल थेरेपी है। अस्पताल में भर्ती होने के 20 दिनों के बाद स्थिति स्थिर होने पर रोगी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। एक महीने के फॉलोअप के बाद, उसका जलोदर (पेट में पानी) पूरी तरह से ठीक हो गया और पीलिया भी सामान्य हो गया। ’’
प्लेक्स हेमोडायलिसिस जैसी एक प्रक्रिया है जिसमें रोगी से रक्त निकाल दिया जाता है और मशीन में सेंट्रीफ्यूगेशन द्वारा सेलुलर घटकों (आरबीसी, डब्ल्यूबीसी और प्लेटलेट) को प्लाज्मा से अलग किया जाता है।
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