लखनऊ, पांच अक्टूबर उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में दलित समुदाय की महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसकी मौत के बाद तेजी से बदल रहे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पुलिस ने सरकार की छवि बिगाड़ने, जाति आधारित संघर्ष की साजिश और राजद्रोह के आरोप में जिले के चंदपा थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। प्रदेशभर में इस प्रकरण से जुड़े कुल 19 मुकदमे दर्ज किये गये हैं।
पुलिस ने जाति आधारित संघर्ष की साजिश, सोशल मीडिया पर झूठे पोस्ट, फर्जी तस्वीर डालकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं प्रदेश सरकार की छवि बिगाड़ने और देश की एकता तथा अखंडता को खतरा पहुंचाने तथा जातीय दंगा फैलाने की साजिश, द्वेषपूर्ण सूचना एवं माहौल बिगाड़ने के आरोप में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की है।
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अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार के मुताबिक हाथरस प्रकरण में हाथरस जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में छह मुकदमों के अलावा सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर आपत्तिजनक टिप्पणी के विरुद्ध बिजनौर, सहारनपुर, बुलंदशहर, प्रयागराज, हाथरस, अयोध्या, लखनऊ में कुल 13 अभियोग पंजीकृत किये गये हैं।
पुलिस की ओर से चंदपा थाने में रविवार की शाम को एक एफआईआर दर्ज कराई गई जिसमें देश की एकता और अखंडता को खतरा पहुंचाने (राजद्रोह) से लेकर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने जैसे कई गंभीर आरोपों की धारा शामिल है।
चंदपा थाने में ही रविवार और सोमवार को राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी सरकारी कार्य में व्यवधान और निषेधाज्ञा के उल्लंघन जैसे आरोपों में अलग-अलग मुकदमा दर्ज कराया गया है।
अपर पुलिस महानिदेशक कुमार ने सोमवार को चंदपा थाने में दर्ज मुकदमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पोस्टरों, सोशल मीडिया पोस्ट से माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
कुमार ने कहा, ‘‘पहला मुकदमा वायरल आडियो से माहौल बिगाड़ने के प्रयास में चंदपा थाने में दर्ज हुआ। एक साजिश के तहत राज्य का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई है। हम सबूतों के आधार पर कार्रवाई कर रहे हैं। कई एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं।''
उल्लेखनीय है कि एक पुलिस उपनिरीक्षक की तहरीर पर हाथरस के चंदपा थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 109 (अपराध के लिए उकसाने), 124ए (देश की एकता और अखंडता को खतरा पहुंचाने की कोशिश-राजद्रोह), 120 बी (षडयंत्र), 153-ए (धर्म और जाति के आधार पर विद्वेष फैलाना), 153-बी (राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले बयान), 195(झूइे साक्षय गढ़ना), 465 (कूटरचना), 468 (कूटरचित दस्तावेजों का प्रयोग), 501(मानहानिकारक मुद्रण), 505 (भय का माहौल बनाने वाला बयान) और सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम 2008 की धारा 67 समेत कुल 20 धाराओं में रविवार को मुकदमा दर्ज किया गया है।
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