नयी दिल्ली, 17 मई केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को विश्व उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) दिवस के अवसर पर 2025 तक उच्च रक्तचाप और मधुमेह से पीड़ित 7.5 करोड़ लोगों की जांच करने और उन्हें मानक देखभाल के तहत लाने की एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है।
इसकी घोषणा केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा आयोजित जी20 सह-ब्रांडेड कार्यक्रम ‘‘उच्च रक्तचाप तथा मधुमेह की रोकथाम और प्रबंधन में तेजी लाना'' में की।
इस नयी योजना के संबंध में घोषणा करते हुए नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी. के. पॉल ने कहा कि यह प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल स्तर पर आरंभ एक समुदाय आधारित दृष्टिकोण के साथ विश्व में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम में एनसीडी (गैर संक्रामक रोग) का सबसे बड़ा विस्तार होगा।
उन्होंने कहा कि यह संसाधनों के आवंटन, क्षमता में वृद्धि, गतिशीलता और बहु-क्षेत्रवार सहयोग द्वारा एनसीडी पर ध्यान देने के सरकार के स्पष्ट संकल्प को इंगित करता है।
इस 75/25 पहल के अतिरिक्त, 40,000 प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल चिकित्सा अधिकारियों को समुदाय के निकट स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को प्रदान करने के लिए एनसीडी के लिए मानक उपचार कार्यप्रवाह पर प्रशिक्षित करने के लिए ‘सशक्त पोर्टल’ भी लांच किया गया।
राष्ट्रीय गैर संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (एनपी-एनसीडी) के संशोधित प्रचालनगत दिशानिर्देशों को अधिक व्यापक कवरेज के लक्ष्य के साथ जारी किया गया।
पॉल ने कहा, ‘‘माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व के तहत, भारत अमृत काल में अगले 25 वर्षों में एक विकसित देश बन जाने के लिए दृढ़ संकल्पित है। इस लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में, भारत विकसित देशों के समकक्ष जीवन प्रत्याशा, मातृ मृत्यु दर, एनसीडी जैसे सामाजिक संकेतकों में परिणाम प्राप्त करने का प्रयत्न कर रहा है।’’
उन्होंने कहा कि आम बजट 2023-2024 के आउटकम बजट दस्तावेज में पहली बार उच्च रक्तचाप और मधुमेह उपचार का प्रावधान किया गया है जो आउटपुट संकेतकों के रूप में उच्च रक्तचाप और मधुमेह कवरेज सेवाओं में तेजी लाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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