नयी दिल्ली, सात अप्रैल भारत और अमेरिका के बीच विदेश एवं रक्षा मंत्री स्तर की ‘‘टू प्लस टू’’ वार्ता 11 अप्रैल को वाशिंगटन में होगी। इसमें दोनों पक्षों को महत्वपूर्ण क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान प्रदान करने और साझा हितों एवं चिंताओं पर साथ मिलकर काम करने के रास्तों के बारे में चर्चा करने का मौका मिलेगा ।
इस भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एवं विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी ।
बागची ने साप्तहिक प्रेस वार्ता में कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर 11-12 अप्रैल को अमेरिका का दौरा करेंगे। इस दौरान वे दोनों देशों के बीच ‘टू प्लस टू’ वार्ता में हिस्सा लेंगे।
उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री जयशंकर चौथी भारत-अमेरिका मंत्रिस्तरीय ’टू प्लस टू’ वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे, जो 11 अप्रैल को वाशिंगटन में होगी।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व अमेरिका के विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकन और वहां के रक्षा मंत्री लॉयड आस्टिन करेंगे । इस दौरान दोनों देश महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपने संबंधों की प्रगति की समीक्षा करेंगे ।
समझा जाता है कि चौथी भारत-अमेरिका मंत्रिस्तरीय ’टू प्लस टू’ वार्ता में यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा हो सकती है।
बागची ने कहा कि भारत की कुछ ही देशों के साथ ‘‘टू प्लस टू’’ वार्ता की व्यवस्था है । इस दौरान दोनों पक्ष क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे । इसके अलावा भारत अमेरिका द्विपक्षीय एजेंडे से जुड़ी विदेश नीति, रक्षा एवं सुरक्षा मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।
उन्होंने बताया कि जयशंकर का अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन से अलग से मिलने का भी कार्यक्रम है।
प्रवक्ता ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के लिए विदेश मंत्री का अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ सदस्यों से भी मिलने का कार्यक्रम है।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार दलीप सिंह भारत के दौरे पर आए थे । उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में आगाह किया था कि रूस के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों में गतिरोध पैदा करने वाले देशों को अंजाम भुगतने पड़ेंगे।
इस बारे में एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बागची ने कहा कि भारत का रूस के साथ स्थापित आर्थिक संबंध हैं और वर्तमान परिस्थितियों में हमारा ध्यान इन स्थापित आर्थिक संबंधों को स्थिर बनाए रखने पर है।
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