लखनऊ, नौ जून उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने राज्य में 69 हजार बेसिक शिक्षकों की नियुक्ति पर उच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाये जाने का ठीकरा विपक्ष के सिर फोड़ते हुए मंगलवार को उस पर पूरी भर्ती प्रक्रिया को पटरी से उतारने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
विपक्ष ने इसका जवाब देते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि शिक्षक भर्ती घोटाले की जिम्मेदार खुद राज्य सरकार है और वह अपने इस गुनाह का दाग विपक्ष पर लगाना चाहती है।
द्विवेदी ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बेसिक स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिये 69 हजार अभ्यर्थियों की भर्ती प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही थी। तीन से छह जून तक काउंसिलिंग के बाद नियुक्ति पत्र दिये जाने थे। इसी बीच न्यायालय ने प्रक्रिया रोक दी। इसी दौरान अनावश्यक राजनीति करते हुए, नौजवानों के भविष्य से खिलवाड़ करते हुए, सरकार की अच्छी छवि खराब करने के लिये भर्ती प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश की गयी है।
उन्होंने कहा ''मेरा आरोप है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया को पटरी से उतारने के लिये और कोरोना वायरस महामारी में जनता की सेवा करने का श्रेय योगी सरकार को न मिले, इसलिये कुछ राजनीतिक लोगों ने यह अभियान चलाया है।''
मंत्री ने किसी का नाम लिये बगैर कहा ''कुछ लोग ऐसे हैं, जिनका खानदानी पेशा ही भ्रष्टाचार और घोटालों का रहा है। उनका पूरा इतिहास भ्रष्टाचार और घोटालों से भरा है। उनकी कल्पना ही नहीं है कि इतनी बड़ी भर्ती या रोजगार देने का अभियान बिना भ्रष्टाचार के कैसे हो सकता है।''
इस बीच, प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने बेसिक शिक्षा मंत्री के इन आरोपों को हताशापूर्ण करार देते हुए कहा कि सरकार अपना दोष विपक्ष पर मढ़ने की कोशिश कर रही है।
सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि बेसिक शिक्षा मंत्री ने विपक्ष पर जो आरोप लगाए हैं वे हताशापूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार पिछले साढे तीन साल के दौरान कुछ भी नहीं कर सकी और बेसिक शिक्षकों की भर्ती में भी उसने घोटाला कर दिया, इसलिए वह हताश और निराश है और विपक्ष पर आरोप लगा रही है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के मीडिया संयोजक ललन कुमार ने मंत्री पर पलटवार करते हुए कहा, ‘‘जबसे पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षकों की भर्ती में घोटाले का मामला उठाया है उसके बाद से ही इसमें शामिल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित भाजपा सरकार के कई नेताओं की नींद उड़ गई है।’’
उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा मंत्री की बौखलाहट से यह साफ नजर आ रहा है। शिक्षक भर्ती घोटाले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच की जानी चाहिए।
कुमार ने कहा, ‘‘जिनका इतिहास अंग्रेजों की चाटुकारिता और देश से गद्दारी करने का रहा हो वे किसी को देशभक्ति का पाठ न पढ़ाएं।’’
गौरतलब है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति आलोक माथुर ने प्रदेश के बेसिक स्कूलों में 69 हजार शिक्षकों की प्रकिया पर गत तीन जून को रोक लगा दी थी। प्रथम दृष्टया अदालत ने पाया था कि कुछ सवाल एवं जवाब गलत थे इसलिए उनकी नये सिरे से जांच की आवश्यकता है। उच्च न्यायालय की पीठ ने कहा था कि प्रश्नपत्रों की जांच में त्रुटि है।
भर्ती के लिए परीक्षा छह जनवरी 2019 को हुई थी और उसके परिणाम इस साल 12 मई को घोषित हुए।
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