इंदौर/भोपाल, छह अक्टूबर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को इंदौर के पूर्व होलकर शासकों की देश भर में फैली 246 परमार्थिक संपत्तियों की स्वत्वधारी (टाइटलहोल्डर) करार देते हुए इन मिल्कियतों को लेकर अलग-अलग वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों की जांच का आदेश दिया है।
उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति एससी शर्मा और न्यायमूर्ति शैलेंद्र शुक्ला ने इन बेशकीमती सम्पत्तियों को लेकर दायर तीन मुकदमों पर फैसला सुनाते हुए सोमवार को 118 पन्नों का विस्तृत आदेश जारी किया।
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युगल पीठ ने सभी संबंधित पक्षों की दलीलों पर गौर करने के बाद प्रदेश सरकार को पूर्व होलकर शासकों की 246 परमार्थिक संपत्तियों की स्वत्वधारी (टाइटलहोल्डर) बताया। इसके साथ ही कहा कि प्रदेश सरकार इनमें शामिल घाटों, मंदिरों, धर्मशालाओं आदि को सांस्कृतिक विरासत के रूप में आने वाले पीढ़ियों के लिए सहेजने को हरमुमकिन कदम उठाए।
अदालत ने प्रदेश सरकार को यह निर्देश भी दिया कि वह उन सभी व्यक्तियों के खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाए जो समय-समय पर खासगी न्यास की संपत्तियों को कथित रूप से अवैध तौर पर बेचते रहे हैं।
गौरतलब है कि देश की आजादी के बाद रियासतकाल की समाप्ति पर पूर्व होलकर शासकों की परमार्थिक संपत्तियों के रख-रखाव के लिए खासगी (देवी अहिल्याबाई होलकर चैरिटीज) न्यास का गठन किया गया था, लेकिन इंदौर प्रशासन को मिली एक शिकायत में आरोप लगाया गया था कि इन मिल्कियतों में शामिल हरिद्वार स्थित कुशावर्त घाट को अवैध रूप से बेच दिया गया था।
खासगी न्यास की 246 संपत्तियों में 138 मंदिर, 18 धर्मशालाएं, 34 घाट, 12 छतरियां, 24 बगीचे, कुंड आदि शामिल हैं। ये संपत्तियां मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और देश के अन्य राज्यों में हैं।
इस बीच, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खासगी न्यास की संपत्तियों के संबंध में उच्च न्यायालय के निर्णय को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए इसका स्वागत किया है।
सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक मुख्यमंत्री ने न्यास की संपत्तियों की गैरकानूनी बिक्री, इन पर अवैध निर्माण और अन्य कथित गड़बड़ियों को लेकर आर्थिक अपराध अनुसंधान दस्ते (ईओडब्ल्यू) को जांच के निर्देश दिए हैं। ये निर्देश अदालत के निर्णय की पृष्ठभूमि में भोपाल में मंगलवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में दिए गए।
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि न्यास की संपत्तियां जिन व्यक्तियों द्वारा अवैध रूप से बेची गई हैं, उन पर राज्य सरकार उचित कार्रवाई करेगी और जरूरत पड़ने पर कानूनी लड़ाई लड़ते हुए इन मिल्कियतों को वापस लेने का हरसंभव प्रयास करेगी।
चौहान ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार राजस्व विभाग में अलग समिति बनाएगी जो न्यास की संपत्तियों का रख-रखाव और निगरानी करेगी। इसके साथ ही, इन संपत्तियों पर अवैध निर्माणों को हटवाते हुए उन्हें उनका मूल स्वरूप लौटाया जाएगा।
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