US Shoe Removal Policy: जांच के लिए अमेरिकी एयरपोर्ट पर अब जूते उतारने की ज़रूरत नहीं! 2 दशक पुराना नियम खत्म

अमेरिका के एयरपोर्ट पर अब सुरक्षा जांच के दौरान यात्रियों को जूते उतारने की ज़रूरत नहीं होगी. यह 20 साल पुराना नियम बेहतर सुरक्षा तकनीक के कारण हटाया गया है. इस बदलाव का मकसद यात्रियों के लिए सफ़र को आसान और तेज़ बनाना है.

US Airports End Shoe Removal Policy: अमेरिका में हवाई सफ़र करने वालों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है. अब एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान यात्रियों को अपने जूते उतारने की ज़रूरत नहीं होगी. अमेरिका की ट्रांसपोर्टेशन सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (TSA) ने लगभग दो दशक पुराने इस नियम को खत्म कर दिया है.

क्या है पूरी खबर?

अमेरिका की होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने घोषणा की है कि यह बदलाव पूरे देश के हवाई अड्डों पर तुरंत लागू हो गया है. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया है कि सुरक्षा जांच की प्रक्रिया पहले की तरह ही कई स्तरों पर जारी रहेगी.

यात्रियों को अभी भी बेल्ट, कोट, लैपटॉप और तरल पदार्थ अपने बैग से निकालकर जांच करवानी होगी. लेकिन अच्छी बात यह है कि इन नियमों की भी समीक्षा की जा रही है और भविष्य में इनमें भी बदलाव देखने को मिल सकता है.

क्यों बदला गया यह नियम?

क्रिस्टी नोएम ने बताया, "हमारी सुरक्षा तकनीक अब बहुत बदल गई है और विकसित हो गई है. TSA भी बदला है. अब हमारे पास सुरक्षा के लिए एक बहु-स्तरीय और मज़बूत सिस्टम है."

उन्होंने आगे कहा, "यह ज़रूरी है कि हम लोगों को सुरक्षित रखने के तरीके खोजें, लेकिन साथ ही इस प्रक्रिया को आसान और हर किसी के लिए ज़्यादा आरामदायक बनाएं."

एयरलाइंस की संस्था 'एयरलाइंस फॉर अमेरिका' ने भी इस फैसले का स्वागत किया है. उनका कहना है कि इससे लाखों यात्रियों के लिए सफ़र आसान, सुगम और सुरक्षित बनेगा.

यह नियम क्यों शुरू हुआ था?

जूते उतरवाने का यह नियम 2006 में लागू किया गया था. इसकी वजह दिसंबर 2001 की एक घटना थी, जब रिचर्ड रीड नाम के एक ब्रिटिश नागरिक ने अपने जूते में बम छिपाकर पेरिस से मियामी जाने वाली फ्लाइट में धमाका करने की कोशिश की थी. हालांकि, वह अपनी कोशिश में नाकाम रहा और यात्रियों ने उसे पकड़ लिया था. इसी घटना के बाद से सुरक्षा के मद्देनज़र यात्रियों के जूते उतरवाकर उनकी जांच की जाने लगी थी.

इस नए फैसले से एयरपोर्ट पर लगने वाली लंबी लाइनों में कमी आने और यात्रियों का समय बचने की उम्मीद है.

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