होर्मुज की खाड़ी: वो समुद्री रास्ता जिसके बंद होने से दुनिया में मच सकती है खलबली, भारत पर क्या होगा इसका असर?

ईरान-इज़राइल तनाव के कारण होर्मुज की खाड़ी के बंद होने का खतरा बढ़ गया है, जो दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है. अगर यह रास्ता बंद होता है, तो तेल की कीमतें आसमान छू लेंगी और वैश्विक महंगाई बढ़ेगी, जिसका सबसे ज़्यादा असर भारत जैसे एशियाई देशों पर होगा. हालांकि, अमेरिका के सैन्य हस्तक्षेप के डर और खुद के आर्थिक नुकसान की वजह से ईरान के लिए ऐसा कदम उठाना मुश्किल है.

Strait of Hormuz

आजकल ईरान और इज़राइल के बीच तनाव का माहौल है. इस तनाव के बीच एक डर पूरी दुनिया को सता रहा है - कहीं ईरान गुस्से में आकर होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) का रास्ता न बंद कर दे. अगर ऐसा हुआ, तो इसका असर सीधे आपकी और हमारी जेब पर पड़ सकता है.

आइए समझते हैं कि ये होर्मुज की खाड़ी आखिर है क्या और ये इतनी ज़रूरी क्यों है.

दुनिया की सबसे ज़रूरी तेल की 'नली'

होर्मुज की खाड़ी, ईरान और ओमान के बीच एक संकरा समुद्री रास्ता है. इसे आप दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल की 'नली' या 'पाइपलाइन' समझ सकते हैं. 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर में खपत होने वाले कुल तेल का लगभग 20% हिस्सा, यानी हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुज़रता है.

यह तेल सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इराक, ईरान, कुवैत और बहरीन जैसे देशों से आता है. इसका ज़्यादातर हिस्सा (करीब 84%) एशिया के देशों, जैसे चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया को जाता है. चीन अपनी ज़रूरत का लगभग आधा तेल इसी रास्ते से मंगाता है.

यह रास्ता इतना अहम इसलिए भी है क्योंकि इसका कोई दूसरा बढ़िया विकल्प नहीं है. ज़मीन के रास्ते जो पाइपलाइनें हैं, उनकी क्षमता इतनी नहीं है कि वे इतने बड़े पैमाने पर तेल की सप्लाई कर सकें.

ईरान इसे कैसे बंद कर सकता है?

ईरान के पास इस समुद्री रास्ते को कुछ समय के लिए रोकने की ताकत है.

अगर रास्ता बंद हुआ तो क्या होगा?

अगर ईरान ने होर्मुज की खाड़ी को बंद कर दिया, तो इसका असर तुरंत दिखेगा.

लेकिन, ईरान शायद ऐसा न करे. क्यों?

इतनी ताकत होने के बावजूद, ईरान के लिए यह कदम उठाना अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा. इसके कई कारण हैं:

  1. खुद का नुकसान: रास्ता बंद करने से ईरान का खुद का तेल एक्सपोर्ट भी ठप हो जाएगा, जो उसकी कमाई का मुख्य ज़रिया है.
  2. चीन की नाराज़गी: चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और तेल का ग्राहक है. रास्ता बंद करने से चीन को भारी नुकसान होगा और ईरान ऐसा बिल्कुल नहीं चाहेगा.
  3. पड़ोसी देशों से दुश्मनी: इस रास्ते का इस्तेमाल करने वाले सऊदी अरब और UAE जैसे अरब पड़ोसी भी ईरान के खिलाफ हो जाएंगे.
  4. अमेरिका का दखल: सबसे बड़ा कारण है अमेरिका. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर ईरान ने ऐसा कोई कदम उठाया, तो अमेरिकी नौसेना फौरन हरकत में आ जाएगी और बल प्रयोग करके इस रास्ते को कुछ ही घंटों या दिनों में दोबारा खुलवा देगी. ऐसा पहले 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान हो भी चुका है.

संक्षेप में, ईरान के पास दुनिया को डराने के लिए होर्मुज की खाड़ी का पत्ता ज़रूर है, लेकिन इसे खेलना उसके लिए बहुत महंगा सौदा साबित हो सकता है. इसीलिए, तेल की कीमतों में उछाल का खतरा तो है, लेकिन ज़्यादातर जानकारों का मानना है कि यह उछाल थोड़े समय के लिए ही होगा.

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