पाकिस्तान में इस्लामवादियों का उदय, पीएम इमरान खान की बढ़ती जा रही टेंशन

अपने नागरिकों के लिए धार्मिक अधिकारों की आजादी के आधार पर गठित देश इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान एक मुस्लिम बहुल राज्य है, जहां देश लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक सेटअप में धार्मिक समूह और संगठन अहम भूमिका निभाते हैं.

इमरान खान (Photo Credits: Facebook)

इस्लामाबाद, 22 अप्रैल : अपने नागरिकों के लिए धार्मिक अधिकारों की आजादी के आधार पर गठित देश इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान (Islamic Republic of Pakistan)एक मुस्लिम बहुल राज्य है, जहां देश लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक सेटअप में धार्मिक समूह और संगठन अहम भूमिका निभाते हैं. पाकिस्तान में राजनीतिक दलों के लिए राजनीतिक ताकत हासिल करने के लिए विभिन्न रूढ़िवादी और कट्टरपंथी धार्मिक समूहों से निष्ठा की तलाश करना आम बात है, जो उन्हें देश पर शासन करने के लिए विजय सिंहासन तक ले जा सकता है.

कई राजनीतिक दलों द्वारा राजनीतिक लाभ की आड़ में कट्टरपंथी धार्मिक समूहों (Religious Group) को समर्थन दिया गया है, उन्हें सुविधा प्रदान की गई है और उनकी रक्षा की गई है, जिससे उन्हें धर्म के अपने आख्यान को जनता के बीच अभ्यास और प्रसारित करने का लाभ मिलता है. हालांकि, जहां ऐसे कई धार्मिक समूहों ने प्रगति की है और पिछले दिनों देश के लोकतंत्र को चुनौती दी है, वहीं हाल ही में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) की लोकप्रियता और तीव्रता में उछाल ने निश्चित रूप से गंभीर सवाल उठाए हैं कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और सरकार कैसे काम करती है. यह भी पढ़ें : Indo-Canadian Drug Racket: कनाडा में ड्रग्स तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, 25 पंजाबी व्यक्ति गिरफ्तार

पिछले आम चुनावों के दौरान राजनीतिक दौड़ का हिस्सा रहे एक कट्टरपंथी धार्मिक संगठन टीएलपी को इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा निषिद्ध घोषित किया गया था, जिसके बाद पूर्व में सुरक्षा अधिकारियों को हिरासत में लिया गया था और देश में तबाही फैलाया गया था. टीएलपी की लोकप्रिय पहचान इस्लाम और उसके पैगंबर मुहम्मद को निशाना बनाने वाले किसी भी व्यक्ति या देश द्वारा किसी भी गतिविधि या कार्रवाई के प्रति उसकी आक्रामक प्रतिक्रिया है.

टीएलपी का मुख्य एजेंडा किसी भी निंदा कार्रवाई या इरादे के खिलाफ विरोध करना रहा है. इसने देश के सभी कोनों से समर्थन हासिल किया है. टीएलपी के विरोध प्रदर्शनों में हिंसा, रुकावटें, हत्याएं और बर्बरता देखी गई हैं. टीएलपी ने निश्चित रूप से यह दर्शाया है कि धर्म से संबंधित मुद्दों पर उसकी सार्वजनिक उपस्थिति और हिंसक प्रतिक्रिया ने फिर से मौजूदा सरकार और अधिकारियों को अपने घुटनों पर ला दिया है.

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