अहमदाबाद, 26 मई: गुजरात (Gujarat) की अहमदाबाद सिटी सेशंस कोर्ट (Ahmedabad City Sessions Court) ने महिला सुरक्षा और वैवाहिक गरिमा को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने सोमवार (25 मई) को गुरुग्राम (Gurugram) के एक रसूखदार व्यवसायी की नियमित जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया. आरोपी पर अपनी ही पत्नी के साथ बार-बार वैवाहिक दुष्कर्म (Marital Rape), जबरन अप्राकृतिक संबंध बनाने, बेरहमी से मारपीट करने और उसके निजी अंगों को जलती हुई सिगरेट से दागने जैसे रोंगटे खड़े कर देने वाले गंभीर आरोप हैं. पीड़िता, जो अहमदाबाद में रहती है और पेशे से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) है, ने पिछले साल (अक्टूबर 2025 में) इस अमानवीय व्यवहार के खिलाफ शहर की डीसीबी (Detection of Crime Branch) क्राइम ब्रांच में एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी. यह भी पढ़ें: Tamil Nadu: 12वीं की छात्रा से दरिंदगी और हत्या के दोषी को 'डबल फांसी' की सजा, अपराध के महज 77 दिनों के भीतर आया कोर्ट का फैसला
खुद को बताता था 'बिजनेस टाइकून', हाई कोर्ट से झटका मिलने के बाद किया था सरेंडर
मामले के विवरण के अनुसार, दोनों का विवाह साल 2022 में दिल्ली में हुआ था. पीड़ित महिला की यह पहली शादी थी, जबकि आरोपी व्यवसायी की यह दूसरी शादी थी। आरोपी ने खुद की गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले गुजरात उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटाया था और अग्रिम जमानत की गुहार लगाई थी.
अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, आरोपी न स्वयं को एक "बिजनेस टाइकून और मल्टीमिलियनेयर" बताते हुए दावा किया था कि वह कॉर्पोरेट गेस्ट हाउस का एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय व्यवसाय चलाता है. हालांकि, गुजरात हाई कोर्ट ने जनवरी 2026 में उसके अपराध की गंभीरता और फोरेंसिक साक्ष्यों को देखते हुए अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी. हाई कोर्ट से झटका मिलने के बाद आरोपी ने इसी महीने की शुरुआत में अहमदाबाद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण (Surrender) किया था, जिसके बाद उसे चार दिनों की पुलिस कस्टडी में भेजा गया था.
हवाई अड्डे पर भी रखता था नजर; पल-पल की लाइव लोकेशन और तस्वीरें मांगता था पति
सिटी सेशंस कोर्ट के जज पी. बी. पटेल ने सुनवाई के दौरान पीड़ित पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत और वाट्सएप चैट्स (WhatsApp Chats) का बारीकी से अध्ययन किया. अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए अपने आदेश में आरोपी की अत्यधिक सनकी और डराने वाली आदतों का विशेष उल्लेख किया.
जज पी. बी. पटेल ने कहा, "शादी के बाद से ही आरोपी ने शिकायतकर्ता को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था. हद तो तब हो गई जब शिकायतकर्ता अपने मायके जाने के लिए हवाई अड्डे (Airport) पर फ्लाइट का इंतजार कर रही थी, उस वक्त भी आरोपी लगातार वीडियो कॉल और चैट के जरिए उस पर नजर रख रहा था. वह लगातार पूछताछ कर रहा था कि उसके बगल में कौन बैठा है, उसकी उम्र क्या है और वह लगातार उसकी निगरानी (Spying) कर रहा था." अदालत ने पाया कि पीड़िता जब भी कहीं बाहर जाती थी, तो उसे जबरन अपनी तस्वीरें, आसपास खड़े लोगों की जानकारी और लाइव लोकेशन (Live Location) पति को भेजनी पड़ती थी.
पहली पत्नी ने भी लगाए थे ऐसे ही आरोप, कोर्ट ने कहा- 'यह जघन्य अपराध'
सरकारी वकील सुधीर ब्रह्मभट्ट ने जमानत का पुरजोर विरोध करते हुए अदालत को बताया कि आरोपी एक आदतन अपराधी (Repeat Offender) है. जांच में सामने आया है कि आरोपी की पहली पत्नी ने भी उसके खिलाफ इसी तरह के अप्राकृतिक यौन शोषण और क्रूरता के गंभीर आरोप लगाए थे, जिससे स्पष्ट होता है कि वह महिलाओं के साथ इसी तरह की हिंसक प्रवृत्तियों का आदी है.
अभियोजन पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, "पति ने न केवल अप्राकृतिक यौन संबंध (Unnatural Sex) की मांग की, बल्कि जबरन शारीरिक संबंध भी बनाए. एफआईआर में दर्ज तथ्य, जलती हुई सिगरेट से निजी अंगों को दागने जैसी क्रूरता और मानसिक आघात किसी भी रूप में सामान्य वैवाहिक विवाद नहीं हैं. यह पत्नी के उत्पीड़न और शारीरिक शोषण का एक जघन्य मामला (Heinous Crime) है. अतः मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए यह अदालत आरोपी को जमानत देने से इनकार करती है." इस कड़े अदालती रुख के बाद आरोपी को फिलहाल सलाखों के पीछे ही रहना होगा, जबकि डीसीबी क्राइम ब्रांच इस हाई-प्रोफाइल केस की आगे की जांच कर रही है.













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