बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन: मोहम्मद यूनुस के 'सेवन सिस्टर्स' वाले बयान से भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, उग्रवाद बढ़ने की आशंका
बांग्लादेश में तारिक रहमान के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बीच, निवर्तमान मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के 'सेवन सिस्टर्स' को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान ने भारत की चिंता बढ़ा दी है. सुरक्षा एजेंसियों ने पूर्वोत्तर में उग्रवाद के दोबारा सिर उठाने की चेतावनी दी है.
नई दिल्ली: बांग्लादेश (Bangladesh) में राजनीतिक बदलाव के साथ ही सीमा पार से आने वाले बयानों ने भारतीय सुरक्षा (Indian Security) गलियारों में हलचल तेज कर दी है. बांग्लादेश के नवनियुक्त प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Tarique Rahman) ने मंगलवार (17 फरवरी 2026) को शपथ ग्रहण की, लेकिन निवर्तमान मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) के विदाई भाषण ने एक नया कूटनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. यूनुस द्वारा भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (सेवन सिस्टर्स) (Seven Sisters) को लेकर की गई टिप्पणियों को भारतीय सुरक्षा एजेंसियां 'भड़काऊ' और 'गैर-जिम्मेदाराना' मान रही हैं. यह भी पढ़ें: Bangladesh PM Oath Ceremony: बांग्लादेश में 17 फरवरी को तारिक रहमान लेंगे PM पद की शपथ, भारत-पाक समेत 13 देशों को न्योता
मोहम्मद यूनुस का विवादास्पद बयान
मोहम्मद यूनुस ने अपने विदाई भाषण में एक क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण का खाका पेश किया, जिसमें उन्होंने नेपाल और भूटान के साथ भारत के 'सेवन सिस्टर्स' (पूर्वोत्तर राज्यों) का जिक्र किया. विशेषज्ञों का कहना है कि यूनुस ने जानबूझकर पूर्वोत्तर राज्यों को भारत से अलग इकाई के रूप में पेश करने की कोशिश की. इससे पहले 2025 में अपनी चीन यात्रा के दौरान भी उन्होंने इन राज्यों को 'लैंडलॉक्ड' बताते हुए बांग्लादेश को उनका 'समुद्री संरक्षक' करार दिया था, जिस पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी.
सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ती चिंता
इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारियों के अनुसार, यूनुस का यह बयान उग्रवादी समूहों को उकसाने की एक सोची-समझी कोशिश हो सकती है.
- उग्रवाद की वापसी का डर: 2001-2006 के दौरान जब BNP और जमात-ए-इस्लामी सत्ता में थे, तब पूर्वोत्तर के कई उग्रवादी गुटों ने बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए किया था.
- चिकन नेक (Siliguri Corridor): सुरक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे 'चिकन नेक' भी कहा जाता है, बेहद संवेदनशील है. यूनुस के बयान इस क्षेत्र में अशांति फैलाने वाले विदेशी तत्वों (विशेषकर चीन) के हितों को बढ़ावा दे सकते हैं.
जमात-ए-इस्लामी का बढ़ता प्रभाव
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक और बड़ी चिंता सीमावर्ती क्षेत्रों में जमात-ए-इस्लामी का मजबूत होना है. हालिया चुनावों में जमात ने भारत से सटे निर्वाचन क्षेत्रों में बड़ी जीत हासिल की है. इन क्षेत्रों में कट्टरपंथी स्कूलों और प्रोपेगेंडा के जरिए लंबे समय से भारत विरोधी माहौल तैयार किया गया है. डर इस बात का है कि यह प्रभाव एक बार फिर ध्वस्त किए जा चुके आतंकी बुनियादी ढांचे को सक्रिय करने में मदद कर सकता है. यह भी पढ़ें: बांग्लादेश की नई सरकार के सामने चुनौतियों का पहाड़
भारत-बांग्लादेश संबंधों का नया अध्याय
जहाँ एक ओर यूनुस का रुख भारत विरोधी रहा, वहीं पीएम मोदी ने तारिक रहमान को भविष्य के लिए शुभकामनाएं भेजी हैं. पीएम मोदी 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के कारण शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हो सके, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने वहां भारत का प्रतिनिधित्व किया. भारत की कोशिश है कि नई सरकार के साथ मिलकर उन आतंकी ढांचों को दोबारा न पनपने दिया जाए जिन्हें कड़ी मशक्कत के बाद खत्म किया गया था.