London Protest, Immigration Crisis: लंदन के सेंट्रल इलाके में शनिवार को बड़ा हंगामा देखने को मिला. यहां करीब 1 लाख 10 हजार लोग एंटी-इमिग्रेशन मार्च में शामिल हुए. इस मार्च का नेतृत्व विवादित एक्टिविस्ट टॉमी रॉबिन्सन ने किया. पुलिस ने बताया कि इस दौरान कई पुलिस अधिकारियों पर हमला भी हुआ, जिसके बाद हालात संभालने के लिए 1600 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात करने पड़े.
यह प्रदर्शन “यूनाइट द किंगडम मार्च” के नाम से निकाला गया था. वहीं, दूसरी ओर ‘स्टैंड अप टू रेसिज्म’ नाम से एक छोटा विरोध भी हुआ, जिसमें करीब 5000 लोग शामिल थे. दोनों गुटों के आमने-सामने आने से तनाव और बढ़ गया.
कैसे शुरू हुआ प्रदर्शन?
मार्च की शुरुआत प्रवासियों को ठहराए गए होटलों के बाहर विरोध से हुई. लोग यूनियन जैक और इंग्लैंड का लाल-सफेद झंडा लेकर आए. कई प्रदर्शनकारी अमेरिकी और इज़राइली झंडे लहरा रहे थे और ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ वाली कैप पहने नजर आए. भीड़ ने प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के खिलाफ नारेबाजी की और “उन्हें घर भेजो” जैसे संदेश वाली तख्तियां भी उठाईं.
🚨BREAKING: Massive crowds in London for a 'Unite the Kingdom' rally.
Organisers are expecting up to 1 million attendees. pic.twitter.com/RsLuOce9Ix
— World Source News 24/7 (@Worldsource24) September 13, 2025
कौन हैं टॉमी रॉबिन्सन?
टॉमी रॉबिन्सन का असली नाम स्टीफन याक्सली-लेनन है. वे खुद को पत्रकार बताते हैं और दावा करते हैं कि वे सरकारी खामियों को उजागर करते हैं. उन्हें एलॉन मस्क जैसे बड़े नामों का समर्थन भी मिला है. हालांकि, उनके आपराधिक मामलों के चलते ब्रिटेन की सबसे बड़ी एंटी-इमिग्रेशन पार्टी रिफॉर्म यूके उनसे दूरी बनाए हुए है.
समर्थकों का क्या कहना है?
रैली में शामिल सैंड्रा मिशेल ने कहा – “हम अपना देश वापस चाहते हैं. अवैध प्रवास को रोकना बेहद जरूरी है. हम टॉमी रॉबिन्सन पर भरोसा करते हैं.”
पुलिस की चुनौती
पुलिस के लिए यह दिन बेहद मुश्किल रहा. प्रदर्शन के साथ-साथ शहर में फुटबॉल मैच और म्यूजिक कॉन्सर्ट भी हो रहे थे. इसलिए 500 अतिरिक्त पुलिस अधिकारी बाहर से बुलाए गए. पुलिस कमांडर क्लेयर हेन्स ने कहा कि वे किसी भी तरह का पक्षपात किए बिना कानून व्यवस्था संभालेंगी और किसी भी आपराधिक गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई होगी.
ब्रिटेन में गरमाया इमिग्रेशन का मुद्दा
ब्रिटेन में इस वक्त इमिग्रेशन सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बना हुआ है. इस साल अब तक 28 हजार से ज्यादा प्रवासी छोटी नावों से इंग्लिश चैनल पार करके ब्रिटेन पहुंचे हैं. कई लोग इसे देशभक्ति से जोड़कर देखते हैं, जबकि विरोधियों का कहना है कि यह विदेशी समुदायों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देता है.













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