Khaleda Zia Dies: नहीं रहीं बांग्लादेश की पहली महिला PM खालिदा जिया, 80 साल की उम्र में लंबी बीमारी के चलते निधन
बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया का मंगलवार को 80 वर्ष की उम्र में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया- उनके निधन की पुष्टि उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने की
Khaleda Zia Dies: बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया अब इस दुनिया में नहीं रहीं. मंगलवार को 80 साल की उम्र में लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया. उनके निधन की पुष्टि उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने की. खालिदा जिया पिछले कई महीनों से उम्र संबंधी गंभीर बीमारियों-जैसे उन्नत लीवर सिरोसिस, अर्थराइटिस, डायबिटीज़ और हृदय व श्वसन संबंधी जटिलताओं-से जूझ रही थीं. वह 23 नवंबर से ढाका के एवरकेयर अस्पताल में भर्ती थीं और 11 दिसंबर को उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था. लेकिन आज 30 दिसंबर को उनका निधन हो गया.
दो दिन से उनकी तबियत गंभीर थी
पिछले दो दिनों से उनकी तबीयत अत्यंत गंभीर बनी हुई थी. सोमवार देर रात उनकी स्थिति और बिगड़ गई. कतर से उन्हें लंदन ले जाने के लिए एक विशेष विमान भी तैयार रखा गया था, लेकिन मेडिकल बोर्ड ने उनकी हालत को देखते हुए एयरलिफ्ट की अनुमति नहीं दी. यह भी पढ़े: Basanti Chatterjee Dies: नहीं रहीं मशहूर बंगाली अभिनेत्री बासंती चटर्जी, 88 साल की उम्र में निधन
बेटे तारीक 17 साल बाद हाल ही में ढाका लौटे
उनके बेटे तारीक रहमान, जो 17 साल बाद हाल ही में ढाका लौटे हैं, फरवरी में होने वाले आम चुनाव के प्रमुख दावेदारों में शामिल माने जा रहे हैं. वह ढाका-17 और बोगुरा-6 सीटों से चुनाव लड़ेंगे. रविवार को वह अस्पताल पहुंचे थे और उन्होंने अपनी मां के साथ दो घंटे से अधिक समय बिताया था.
खालिदा जिया- बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री
खालिदा जिया ने दो बार प्रधानमंत्री पद संभाला-पहली बार 1991 से 1996 तक और दूसरी बार 2001 से 2006 तक। वे न केवल बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं, बल्कि मुस्लिम बहुल देश में लोकतांत्रिक सरकार का नेतृत्व करने वाली दूसरी महिला भी थीं.
जियाउर रहमान की पत्नी है खालिदा जिया
उनके पति जियाउर रहमान बांग्लादेश के छठे राष्ट्रपति थे और 1971 के मुक्ति संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल थे। 1981 में उनकी हत्या के बाद भी खालिदा जिया ने अपना राजनीतिक संघर्ष जारी रखा.
खालिदा जिया 1984 में वह BNP की चेयरपर्सन बनीं
1984 में वह BNP की चेयरपर्सन बनीं. उनकी नेतृत्व में पार्टी ने एच.एम. इर्शाद की सैन्य सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन चलाया. इर्शाद के करीब नौ वर्ष के शासनकाल में खालिदा जिया को कई बार हिरासत में भी लिया गया.
1990 में व्यापक जन आंदोलन के चलते इर्शाद को इस्तीफा देना पड़ा. इसके बाद 1991 के आम चुनाव में खालिदा जिया ने ऐतिहासिक जीत हासिल की और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं.
1996 में वह दोबारा सत्ता में लौटीं, लेकिन तीव्र विरोध प्रदर्शनों के चलते एक महीने के भीतर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। बाद में 1999 में BNP ने चार दलों का गठबंधन बनाकर आंदोलन तेज किया और सत्ता में वापसी की.