जर्मनी में बचाई गई हम्पबैक व्हेल टिम्मी की डेनमार्क के पास मौत

जर्मनी में बचाई गई हम्पबैक व्हेल टिम्मी का शव डेनमार्क के अनहोल्ट द्वीप के पास मिला, जिससे उसके बचाव अभियान के बावजूद जीवित न रह पाने की पुष्टि हुई.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

जर्मनी में बचाई गई हम्पबैक व्हेल टिम्मी का शव डेनमार्क के अनहोल्ट द्वीप के पास मिला, जिससे उसके बचाव अभियान के बावजूद जीवित न रह पाने की पुष्टि हुई. अधिकारियों ने लोगों को शव से दूर रहने की चेतावनी दी है,जर्मनी में कुछ सप्ताह पहले बचाई गई एक हम्पबैक व्हेल की डेनमार्क के पास मौत हो गई है. अधिकारियों ने शनिवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मृत व्हेल वही है जिसे पहले जर्मनी के तट पर फंसे होने के बाद बचाने की कोशिश की गई थी. जर्मन मीडिया में इस व्हेल को टिम्मी नाम दिया गया था.

डेनिश पर्यावरण संरक्षण एजेंसी की डिवीजन प्रमुख जेन हैंसन ने कहा कि आनहोल्त द्वीप के पास फंसी यह व्हेल वही है, जिसे जर्मनी में बचाए जाने की प्रक्रिया के तहत समुद्र में छोड़ा गया था. उन्होंने बताया कि व्हेल के शरीर पर लगे ट्रैकिंग उपकरण की पहचान के आधार पर यह पुष्टि की गई है.

यह व्हेल पहली बार 23 मार्च को जर्मनी के बाल्टिक सागर तट पर ल्यूबेक शहर के पास एक रेत के टीलों पर फंसी हुई नजर आई थी. उस समय इसे निकालने के कई प्रयास किए गए, लेकिन शुरुआत में उन कोशिशों में सफलता नहीं मिली. कुछ समय के लिए यह खुद को मुक्त कराने में कामयाब हुई, लेकिन बाद में फिर कई बार अलग अलग स्थानों पर फंसती रही.

लंबे समय तक चले प्रयासों के बाद अधिकारियों ने इसे बचाने की कोशिश छोड़ने का भी फैसला कर लिया था. हालांकि बाद में दो निजी उद्यमियों, कारिन वॉल्टर मोमर्ट और वॉल्टर गुंज ने इस व्हेल को बचाने के लिए आर्थिक सहायता दी. इस अभियान पर लगभग 15 लाख यूरो खर्च होने का अनुमान लगाया गया था.

इन उद्यमियों ने एक योजना तैयार की, जिसे कई विशेषज्ञों ने जोखिम भरा बताया था. योजना के तहत व्हेल को धीरे-धीरे एक खास पानी से भरे अस्थायी स्विमिंग पूल में लाया गया और फिर उसे उसके प्राकृतिक आवास की ओर समुद्र में ले जाकर छोड़ा गया. आखिरकार 2 मई को व्हेल को डेनमार्क के पास उत्तरी सागर में छोड़ दिया गया था.

विस्फोट का खतरा

डेनमार्क के अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार को कटेगाट जल क्षेत्र में अनहोल्ट द्वीप के पास इस व्हेल का शव पहली बार देखा गया. शुरुआत में इसकी पहचान को लेकर स्पष्टता नहीं थी, लेकिन बाद में ट्रैकिंग डिवाइस को निकालकर उसकी स्थिति और स्वरूप की जांच की गई, जिससे यह पुष्टि हुई कि यह वही व्हेल है.

जेन हैंसन ने बताया कि फिलहाल व्हेल को उस स्थान से हटाने या उसका पोस्टमॉर्टम करने की कोई ठोस योजना नहीं है. उन्होंने कहा कि अभी इसे आसपास के क्षेत्र के लिए किसी बड़ी समस्या के रूप में नहीं देखा जा रहा है.

हालांकि एजेंसी ने लोगों को इस मृत व्हेल के पास जाने से सख्ती से मना किया है. अधिकारियों का कहना है कि व्हेल के शरीर से बीमारियां फैलने का खतरा हो सकता है. इसके अलावा, सड़ने की प्रक्रिया के दौरान गैस बनने से विस्फोट का भी खतरा पैदा हो सकता है. इसलिए लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है.

जर्मनी में जब यह व्हेल पहली बार फंसी थी, तब इस घटना को जनता ने काफी करीब से देखा और इसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी. कई सप्ताह तक यह समाचारों में बनी रही और इसके बचाव अभियान को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी. निजी स्तर पर बचाव अभियान को लेकर उस समय कुछ विशेषज्ञों ने आलोचना भी की थी. उनका मानना था कि इस तरह के प्रयास से व्हेल को और अधिक तनाव हो सकता है.

दुखी हैं लोग

जर्मनी के मैकलेनबुर्ग वेस्ट पोमेरानिया क्षेत्र के पर्यावरणमंत्री टिल बाकहाउस ने व्हेल की मौत पर दुख जाहिर करते हुए कहा कि इस घटना से हमें पता चलता है कि प्रकृति संरक्षण, प्रजातियों की रक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों को और गंभीरता से लेने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इस मामले से सीख लेकर भविष्य में बेहतर उपाय किए जाने चाहिए.

बाकहाउस ने यह भी कहा कि वह डेनमार्क के अधिकारियों के साथ इस मामले पर बातचीत करना चाहते हैं, जिसमें व्हेल के साथ आगे क्या किया जाएगा और निजी प्रयासों की भूमिका पर भी चर्चा शामिल होगी. उन्होंने इस घटना को एक महत्वपूर्ण अनुभव बताते हुए कहा कि इस तरह की परिस्थितियों में समन्वित और वैज्ञानिक तरीकों की आवश्यकता होती है.

टिम्मी नाम की यह व्हेल अपने बचाव अभियान और उसके बाद की यात्रा के कारण यूरोप में चर्चा का विषय बन गई थी. हालांकि इसे समुद्र में वापस छोड़ने के बावजूद इसकी जान नहीं बचाई जा सकी. अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता क्षेत्र की सुरक्षा और लोगों को संभावित जोखिमों से दूर रखना है.

विवेक कुमार (डीपीए, एएफपी)

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