जापान को आकुस का सदस्य बनाने में हिचक
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

जापान को आकुस में शामिल करने को लेकर ऑस्ट्रेलिया ने ज्यादा उत्साह नहीं दिखाया है. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की तरफ से सकारात्मक बयान के बाद ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि जापान के साथ सहयोग सिर्फ परियोजनाओं पर आधारित होगा.सोमवार को आकुस की ओर से जारी एक साझा बयान में कहा गया था कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और सैन्य सहयोग बढ़ाने के लिए संगठन अपना विस्तार करने पर विचार कर रहा है.

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता सबरीना सिंह ने कहा, "जापान की शक्तियों और तीनों सदस्यों (ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका) के साथ रक्षा क्षेत्र में जारी उसके सहयोग को देखते हुए हम जापान को आकुस के दूसरे स्तंभ के रूप में देख रहे हैं. इससे सैन्य तकनीकों का आदान प्रदान हो सकेगा."

इस बयान के कुछ ही घंटे बाद ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीजी ने जापान की एक सहयोगी के रूप में तारीफ की लेकिन साथ ही कहा कि आकुस में जापान को शामिल करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है. उन्होंने कहा, "जो (अमेरिका में) प्रस्तावित है, वह परियोजना के आधार पर आकुस का दूसरा स्तंभ खड़ा करने के बारे में है और जापान उसके लिए कुदरती उम्मीदवार है. आकुस की सदस्यता में विस्तार का कोई प्रस्ताव नहीं है."

इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने भी अल्बानीजी की बात दोहराई और कहा कि जापान कुछ तकनीक-आधारित परियोजनाओं पर ही आकुस के साथ काम करेगा, ना कि उसका सदस्य बनेगा.

क्या है आकुस?

ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका ने 2021 में आकुस (AUKUS) का गठन किया था. यह अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए उठाए जा रहे कदमों का ही एक हिस्सा है. चीन की बढ़ती सैन्य ताकत, ताइवान पर उसका प्रभाव और दक्षिणी चीन सागर में उसकी सैन्य तैनाती इन कदमों के केंद्र में है.

आकुस एक रक्षा समझौता है जो विशेषकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर केंद्रित है. इस समूह के समझौते के तहत अमेरिका और ब्रिटेन अपनी परमाणु शक्तिसंपन्न पनडुब्बियों की तकनीक ऑस्ट्रेलिया के साथ साझा करेंगे.

इसके अलावा तीनों देश मिलकर हाइपरसोनिक और काउंटर-हाइपरसोनिक और इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमताओं को बढ़ाने में भी सहयोग करेंगे. अप्रैल 2022 में एक बैठक के बाद जारी साझा बयान में भी संगठन के विस्तार की बात कही गई थी. उस बयान में कहा गया, "जैसे-जैसे इन महत्वपूर्ण रक्षा और सुरक्षा क्षमताओं पर हमारा काम बढ़ेगा, हम अन्य सहयोगियों और साझीदारों को भी शामिल करेंगे."

नए सदस्यों को लेकर झिझक

जापान के अलावा न्यूजीलैंड को भी इस समझौते में शामिल करने के बारे में कहा जा चुका है लेकिन अमेरिका अपनी तकनीक अन्य देशों के साथ साझा करने को लेकर हिचकता रहा है, इसलिए अब तक विस्तार के संबंध में ज्यादा कुछ नहीं हो पाया है.

लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया आकुस में चौथे सदस्य को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं है. एक कूटनीतिज्ञ ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की चिंता यह है कि अगर चौथा देश शामिल होता है तो समझौते का केंद्र उसे मिलने वाली पनडुब्बियों से हट सकता है और इससे उसे ये परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी मिलने में देर हो सकती है.

जापान को भी ऑस्ट्रेलिया की इस झिझक का अहसास है. एक जापानी अधिकारी ने कहा कि जापान के औपचारिक रूप से संगठन का सदस्य बनने को लेकर ब्रिटेन या ऑस्ट्रेलिया तब तक हामी नहीं भरेंगे जब तक इस समझौते से उन्हें ठोस नतीजे नहीं मिल जाते.

इस अधिकारी ने नाम प्रकाशित ना करने की शर्त पर समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "समझौते से अब तक कुछ हासिल नहीं हुआ है और ऐसे में नए सदस्य जोड़ने से सहयोग का ढांचा डगमगा सकता है, जो इसका मूल आधार है."

जापान पर पूरा भरोसा नहीं

आकुस के रक्षा विशेषज्ञों में जापान की साइबर सुरक्षा तकनीक को लेकर भी बहुत भरोसा नहीं है और वे कहते हैं कि समझौते में शामिल होने का अर्थ संवेदनशील तकनीकों और जानकारियों को साझा करना होगा, जिसके लिए पहले जापान को तैयार होने की जरूरत है.

जापान के प्रधानमंत्री फूमियो किशिदा अमेरिका के दौरे पर हैं जहां बुधवार को उनकी मुलाकात अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन से होनी है. इस मुलाकात में जापान को आकुस की परियोजनाओं में शामिल करने पर चर्चा हो सकती है.

अमेरिका के उप-विदेश मंत्री कर्ट कैंबेल आकुस के दूसरे स्तंभ को खड़ा करने को लेकर काफी उत्सुक हैं. वह चाहते हैं कि जापान को ज्यादा जगह मिले. पिछले हफ्ते उन्होंने कहा था कि अमेरिका जापान को इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की सुरक्षा बेहतर बनाने और खुफिया जानकारियों के संभालकर रखने के लिए अपने अधिकारियों को ज्यादा जवाबदेह बनाने को प्रोत्साहित कर रहा है.

कैंबेल ने कहा, "जापान ने इस संबंध में कई कदम उठाए हैं लेकिन सभी उपाय नहीं किए हैं."

वीके/एए (रॉयटर्स, डीपीए)