कुशल कामगारों को आकर्षित करने की जर्मनी की नई पहल
जर्मनी को अपने श्रम बाजार के लिए कुशल कामगारों की जरूरत है.
जर्मनी को अपने श्रम बाजार के लिए कुशल कामगारों की जरूरत है. ऐसे में नये लोगों के साथ-साथ नये तरीकों की भी तलाश है. कुछ ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं जिनसे व्यवसायों और कुशल कामगारों दोनों की मदद हो.गिडो जाइफेन एक मझोले आकार की जर्मन कंपनी 'ओमेक्सोम होखश्पानुंग' के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. यह कंपनी बड़ी बिजली लाइनों का निर्माण करती है और इस कंपनी में लगभग 500 कर्मचारी काम करते हैं. वह बताते हैं कि जर्मनी में अलग-अलग जगहों पर फैले निर्माण स्थलों के लिए कुशल कामगार ढूंढना अब पहले से अधिक मुश्किल हो गया है. यह काम भी ऐसा है कि अक्सर लोगों को हफ्तों तक अपने परिवार और घर से दूर रहना पड़ता है.
अब जाइफेन को उम्मीद है कि वह जर्मनी-वियतनाम विकास सहयोग परियोजना के जरिए वियतनाम से नए कुशल कामगार भर्ती कर पाएंगे. इस समय वियतनाम नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है और इसके लिए उसे जर्मन डेवलपमेंट एजेंसी 'डॉयचे गेजेलशाफ्ट फ्यूर इंटरनात्सिओनाल सुजामेनआरबाइटऑ (जीआईजेड) से समर्थन मिल रहा है. जर्मनी को ओवरहेड लाइन टेक्नीशियन (यानी बिजली की ऊंची तारों पर काम करने वालों) की जरूरत है और वियतनाम की बिजली कंपनी ईवीएन ने इस काम में कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के लिए एक खास प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया है.
क्या जर्मनी में कुशल कामगारों की कमी प्रवासन नीति की देन?
इस परियोजना में ओमेक्सोम अपना अनुभव और विशेषज्ञता बांटना चाहता है. कंपनी की योजना है कि वह ईवीएन के वियतनामी प्रशिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए जर्मनी लाए ताकि उन्हें जर्मनी के स्थानीय मानकों के अनुसार प्रशिक्षण दे सके. साथ ही, जर्मन चेंबर ऑफ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स इसके लिए सर्टिफिकेट भी जारी करेगा. वियतनाम के प्रशिक्षण केंद्र में जीआईजेड जर्मन भाषा के कोर्स भी शुरू कर रहा है.
जाइफेन ने कहा कि पर्याप्त टेक्नीशियनों को प्रशिक्षण देना है ताकि कम से कम आधों को जर्मनी में नौकरी दी जा सके, यानी लगभग 200 लोगों को. उनके अनुसार यह "दोनों के लिए ही फायदे का सौदा होगा.”
निष्पक्ष तरीके से कुशल कामगारों की भर्ती के लिए वी-फेयर गठबंधन
जर्मन संघीय सरकार अब ऐसे प्रोजेक्ट्स का समर्थन कर रही है, जिसमें विदेशी कुशल कामगारों को जर्मनी की ओर आकर्षित करने के साथ-साथ उनके देशों में भी प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत किया जाए. इससे सूचना का आदान-प्रदान बेहतर तरीके से हो सकेगा.
फेडरल मिनिस्ट्री फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (बीएमजेड) पहले से ही कई साझेदारों के साथ मिलकर कुशल कामगारों को प्रशिक्षण दे रहा था और अब जर्मन उद्योगों के भी इसमें शामिल होने की उम्मीद है. इस नए गठबंधन का नाम है "वी-फेयर अलाइंस फॉर द फेयर रीक्रूट्मेंट ऑफ स्किल्ड वर्कर्स” (यानी कुशल कामगारों की निष्पक्ष भर्ती के लिए वी-फेयर गठबंधन). इसके लॉन्च के दौरान विकास मंत्री रीम अलाबाली राडोवन ने बर्लिन में कहा, "जर्मनी को योग्य कुशल कामगारों की जरूरत है.”
उन्होंने आगे कहा कि देश की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है. उन्होंने कहा, "आंकड़े साफ हैं, जर्मनी में 20 फीसदी से ज्यादा कर्मचारी 55 साल या उससे अधिक उम्र के हैं और अगले 10 सालों में रिटायर हो जाएंगे.” जनसंख्या विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले 10 सालों में इस कमी को पूरा करने के लिए जर्मनी को हर साल लगभग चार लाख विदेशी कुशल कामगारों की जरूरत होगी. इसका मतलब हुआ कि इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हर साल करीब 16 लाख लोगों को जर्मनी आना होगा.
दूसरे देशों के साथ समान-स्तर पर सहयोग जरूरी
अलाबाली राडोवन ने कहा, "एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों से भर्ती करना जर्मन अर्थव्यवस्था के लिए लगातार अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है.” वहां की आबादी युवा है, अच्छी तरह शिक्षित है और लगातार बढ़ रही है. उन्होंने आगे कहा, "इन देशों के कई युवा अपने देश के बाहर अवसर तलाश रहे हैं. ऐसे में इन देशों की सरकारें हमसे यानी जर्मन संघीय सरकार से यह उम्मीद करती है कि हम कुशल कामगारों के लिए विदेश में काम करने के लिए रास्ते बनाएं और उन्हें मजबूती दें.”
ऐसे में जरूरी है कि रोजगार पारदर्शी नियमों के अनुसार हो और इसका निरीक्षण भी हो. इसमें काम की परिस्थितियों, वेतन और आवश्यक योग्यताओं की पारदर्शी जानकारी देना जरूरी है. यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों को उनके अपने देश और जर्मनी दोनों में काम करने के लिए तैयार करना चाहिए. खर्च और जोखिम दोनों साझा किए जाने चाहिए और संभावित कुशल कामगारों को आगे के प्रशिक्षण और स्थानांतरण के खर्च को करने के लिए सक्षम होना चाहिए.
जर्मन कंपनियां अक्सर परेशानी को कम आंकती हैं
केन्या में जन्मी ईडिथ ओटिएंडे‑लवानी एक कंसल्टिंग फर्म की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं और 'गिविंग अफ्रीका ए न्यू फेस' एसोसिएशन के जरिए म्यूनिख क्षेत्र में प्रवासियों के समावेशन को समर्थन देती हैं. वह कहती हैं, "हम अक्सर देखते हैं कि कंपनियां यह मानकर चलती हैं कि उन्हें पूरी तरह प्रशिक्षित कर्मचारी मिल जाएगा जिसे वह तुरंत काम पर लगा सकती हैं.” उनके अनुसार, "यह कल्पना होती है कि लोग पहले से ही जर्मन बोलने में सक्षम होकर आएंगे, जल्दी से यहां के माहौल में घुलमिल जाएंगे, मुश्किलों का सामना करने में सक्षम होंगे और जर्मनी से जुड़ी हर चीज के लिए उत्साहित होंगे. लेकिन वास्तविकता कल्पना से काफी अलग होती है."
जर्मन व्यवसायों को अंतर-सांस्कृतिक मामलों पर सलाह देने वाले गेरहार्ड हाइन कहते हैं, "यह केवल सही वाक्य बोलने तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह समझना जरूरी है कि जर्मन कंपनियों में बातचीत और नेतृत्व अलग तरीके से काम करता है.” यहां तक कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी कई बाधाएं आती हैं, जिन्हें पार करना मुश्किल होता है. उन्होंने आगे कहा, "आपको ऐसे लोगों के लिए तैयार रहना होगा जो जर्मन लोगों से अलग तरीके से काम करते हैं, लगभग 80 फीसदी मामलों में.”
जर्मनी छोड़ने का फैसला क्यों कर रहे हैं कई प्रवासी?
लोगों को जर्मनी आने के लिए प्रतीक्षा करते समय भी बहुत धैर्य रखना पड़ता है. बहुत ज्यादा पेपरवर्क के कारण कभी कभी इसमें कई साल भी लग जाते हैं, तब जाकर कोई विदेशी कुशल कामगार वास्तव में इस देश में आकार काम शुरू कर पाता है. न्यूरेमबर्ग चेंबर ऑफ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स के मुख्य कार्यकारी मार्कुस ल्योटत्श के पास ऐसी कई कहानियां हैं. इसके लिए कई सारी अलग-अलग एजेंसियां जिम्मेदार होती हैं और खासकर बड़े शहरों में इमिग्रेशन ऑफिस हमेशा ही अधिक काम के दबाव में रहते हैं. ल्योटत्श बताते हैं, "कई बार तथाकथित "एक्सप्रेस प्रक्रिया” में भी निराशा हाथ आती है.” उन्होंने आगे कहा, "जैसे हमारे वेलकम डेस्क के जरिए हम इमिग्रेशन अधिकारियों के साथ तेज कुशल-कर्मचारी प्रक्रिया के तहत काम करते हैं. ‘तेज कुशल-कर्मचारी प्रक्रिया' सुनने में तो बहुत अच्छा लगता है और यह वादा भी करता है कि सब कुछ जल्दी होगा और इसके लिए आप अतिरिक्त शुल्क भी देते हैं. आप मान लेते हैं कि यह सच में तेज होगा, लेकिन अक्सर ऐसा नहीं होता है.”
इस काम को आसान बनाने के लिए चैंबर ऑफ कॉमर्स इसमें पैसे और स्टाफ का निवेश कर रहा है ताकि आवश्यक दस्तावेजों की प्रारंभिक समीक्षा जैसी जिम्मेदारियां वह संभाल सके. ल्योटत्श ने डीडब्ल्यू को बताया, "इमिग्रेशन अधिकारी जानते हैं कि दस्तावेज एक भरोसेमंद साझेदार से आए हैं और इससे प्रक्रिया काफी आसान तरीके से आगे बढ़ती है.”
देश छोड़कर जा रहे कुशल कामगार
ल्योटत्श के अनुसार, "हमें केवल लोगों के आने के बारे में ही नहीं बल्कि उनके रुकने के बारे में भी बात करनी होगी.” साल 2024 में पहली बार ऐसा हुआ कि जीतने लोग जर्मनी आए, उससे कई अधिक लोग जर्मनी को छोड़कर चले गए. कई बार ऐसा देखा गया है कि विदेशी कुशल कामगार या तो वापस अपने देश लौट जाते हैं या फिर किसी दूसरे देश चले जाते हैं क्योंकि जिस उम्मीद के साथ वह जर्मनी आए थे, वह कहीं न कहीं पूरी नहीं होती है.
मुफ्त निवास का ऑफर देते जर्मन शहर
उद्यमी यास्मिन अरबाबियन-फोगल के अनुसार, इसका काफी बड़ा हिस्सा जर्मन लोगों का प्रवासियों के प्रति रवैये से भी जुड़ा है. जर्मनी अभी भी विदेशी कुशल कामगारों के लिए आकर्षक है. उन्होंने कहा, "लेकिन अगर हम आकर्षक बने रहना चाहते हैं तो यह सीधे तौर पर इस बात पर निर्भर करेगा कि हम देश में पहले से मौजूद प्रवासियों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं.”
फोगल हनोवर में 250 कर्मचारियों वाली एक केयर और सामाजिक सेवा कंपनी चलाती हैं. इसमें कई विदेशी भी शामिल हैं. उन्होंने कहा, "ये शरणार्थी या ऐसे लोग हैं जिन्होंने किसी समय यहां बसने का फैसला किया. मेरी कंपनी जैसी कई अन्य कंपनियां उन्हें प्रशिक्षण देती हैं लेकिन बाद में पता चलता है कि उन्हें तो डिपोर्टेशन नोटिस मिल चुका है. जिसका मतलब हुआ कि—आपके साथ काम करना अच्छा रहा, लेकिन अब अलविदा.”
जर्मनी को प्रवासियों के प्रति एक अलग राजनीतिक और सामाजिक "सोच” अपनाने की जरूरत है. अगर ऐसा नहीं होता है तो कुशल‑कर्मचारी गठबंधन कभी सफल नहीं हो सकता है.
यह लेख मूल रूप से जर्मन में लिखा गया था.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 26, 2026 05:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

