Subhash C Kashyap Dies: संविधान विशेषज्ञ सुभाष सी. कश्यप का 97 वर्ष की आयु में निधन, पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू सहित दिग्गजों ने जताया गहरा शोक
सुभाष सी. कश्यप का निधन (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली, 5 जून: भारत के सबसे प्रतिष्ठित संविधान विशेषज्ञों में से एक और लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष सी. कश्यप (Subhash C Kashyap) का नई दिल्ली (New Delhi) में निधन हो गया है. वह 97 वर्ष के थे और उम्र से संबंधित जटिलताओं के बाद कार्डियो-पल्मोनरी अरेस्ट (Cardiopulmonary Arrest) (हृदय-गति रुकने) के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर से पूरे राजनीतिक और प्रशासनिक हलके में गहरा शोक व्याप्त है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu), उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन (Vice President C.P. Radhakrishnan) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) सहित देश की शीर्ष हस्तियों ने कश्यप के निधन को देश की लोकतांत्रिक और संसदीय परंपराओं के लिए एक बहुत बड़ी क्षति बताया है. यह भी पढ़ें: Rajya Sabha Elections 2026: राज्यसभा चुनाव से पहले बीजेपी का बड़ा दांव, 11 उम्मीदवारों की लिस्ट में दिखा 2029 का रोडमैप; जानें किन चेहरों पर पार्टी ने जताया भरोसा

पीएम मोदी और राष्ट्रपति ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए लिखा, "लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष सी. कश्यप के निधन से अत्यंत दुखी हूँ. वह भारत के अग्रणी संवैधानिक विद्वानों में से एक थे, जिनके संसदीय और संवैधानिक विमर्श में दिए गए योगदान ने हमारे समाज को समृद्ध किया. लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और उनका लेखन हमेशा उल्लेखनीय रहेगा. उनके परिवार और मित्रों के प्रति मेरी संवेदनाएं."

PM नरेंद्र मोदी ने सुभाष सी. कश्यप के निधन पर शोक व्यक्त किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने शोक संदेश में कहा कि कश्यप ने अपनी विद्वत्ता और व्यावहारिक अंतर्दृष्टि से संविधान के अध्ययन और हमारी संसदीय प्रणाली के विकास को एक नई ऊंचाई दी. वहीं, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दुख जताते हुए कहा कि कश्यप का जीवन स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणाओं से गढ़ा हुआ था, जो राष्ट्रीय सेवा, ज्ञान और नैतिक प्रतिबद्धता का एक अनुकरणीय मॉडल था. चाहे संसदीय प्रक्रियाओं का विकास हो, पंचायती राज को मजबूत करना हो या संवैधानिक सुधार, उन्होंने हर भूमिका में अपनी अमिट छाप छोड़ी है.

सुभाष सी. कश्यप ने संविधान के हमारे अध्ययन को समृद्ध किया है

स्वतंत्रता सेनानी से लोकसभा महासचिव तक का सफर

वर्ष 1929 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर में जन्मे सुभाष सी. कश्यप के शुरुआती जीवन पर देश के स्वतंत्रता संग्राम का गहरा प्रभाव पड़ा था, जहां उन्होंने छात्र आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया था। उन्होंने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत पत्रकारिता और अकादमिक क्षेत्र से की थी, जिसके बाद उन्होंने संसद में प्रवेश किया और वहां लगभग चार दशकों तक अपनी सेवाएं दीं.

संसदीय सेवा में लगातार पदोन्नति पाते हुए वह वर्ष 1983 में लोकसभा के महासचिव बने और 1990 तक इस महत्वपूर्ण पद पर रहे. अपने इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने संसदीय प्रक्रियाओं को अधिक सुसंगत और परिष्कृत बनाने तथा लोकतांत्रिक संस्था की विश्वसनीयता को सुदृढ़ करने में बेहद ऐतिहासिक व महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

ओम बिरला कहते हैं, सुभाष सी कश्यप भारतीय संविधान के जीवंत विश्वकोश थे. 

100 से अधिक पुस्तकों के लेखक और 'पद्म भूषण' से सम्मानित

सुभाष सी. कश्यप केवल एक कुशल प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि एक प्रखर और विपुल लेखक भी थे. उन्होंने संवैधानिक कानून, संसदीय प्रथाओं, राजनीतिक सुधारों और जमीनी स्तर के शासन (ग्रासरूट गवर्नेंस) पर 100 से अधिक पुस्तकें और सैकड़ों शोध पत्र लिखे थे. उनकी लिखी किताबें आज भी सांसदों, विधायकों, शिक्षाविदों और राजनीति विज्ञान के छात्रों के लिए सबसे प्रामाणिक संदर्भ (Authoritative References) मानी जाती हैं.

देश के प्रति उनके इसी अद्वितीय योगदान को रेखांकित करते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2015 में उन्हें प्रतिष्ठित 'पद्म भूषण' सम्मान से नवाजा था. संसद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनकी सक्रियता बनी रही; वह वाजपेयी सरकार के समय गठित 'संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग' के सदस्य रहे और हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में बनी 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' (One Nation, One Election) समिति में भी उन्होंने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था.  उनके परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटे और एक बेटी हैं.