बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की तैयारी कर रहा है यूरोप
यूरोपीय संघ के अब तक के कई कदम दिग्गज अमेरिकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाने में ज्यादा सफल नहीं रहे हैं.
यूरोपीय संघ के अब तक के कई कदम दिग्गज अमेरिकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाने में ज्यादा सफल नहीं रहे हैं. बैन कैसे लागू होगा, इसपर भी सवाल हैं.जब फ्रांस के सांसदों ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने के पक्ष में वोट किया. तो इसके कुछ दिनों के भीतर ही स्पेन के प्रधानमंत्री, पेद्रो सांचेज ने भी स्पेन के बच्चों को "डिजिटल वाइल्ड वेस्ट” यानी इंटरनेट की खतरनाक और अनियंत्रित दुनिया से बचाने की कसम खाई.
विशेषज्ञों का कहना है कि घंटों तक सोशल मीडिया पर हानिकारक कंटेंट देखते रहने से बच्चों के दिमाग की सोच और व्यवहार बदल रहा है. साथ ही, उनमें एंग्जायटी, तनाव और दूसरी मानसिक व स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं. इसलिए यूरोपीय सरकार अब इसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर हो रही हैं.
ब्रसेल्स स्थित थिंक टैंक, ब्रूगेल के विशेषज्ञ पॉल ओ. रिक्टर ने डीडब्ल्यू से कहा, "बच्चों पर खास ध्यान इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि उन्हें लंबे समय में ज्यादा नुकसान पहुंचने का खतरा है, क्योंकि उनका दिमाग अभी भी विकसित हो रहा है. कई शोध दिखाते हैं कि सोशल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का ज्यादा खतरा बढ़ सकता है.”
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यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष, उर्सुला फॉन डेय लाएन भी पूरे यूरोपीय संघ में सोशल मीडिया के लिए उम्र सीमा तय करने के समर्थन में है, जो कि ऑस्ट्रेलिया के कानून जैसा ही होगा, जहां सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की न्यूनतम उम्र 16 साल तय की गई है. लेकिन यहां असल सवाल यह है कि यह बैन लागू कैसे किया जाएगा और क्या सच में यह काम करेगा भी या नहीं?
कौन से यूरोपीय देश बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने का सोच रहे हैं?
फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने वाला बिल, अब संसद के ऊपरी सदन में वोटिंग के लिए भेजा जा रहा है.
इसके अलावा, स्पेन में मंत्रिपरिषद से उम्मीद है कि वह 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन को मंजूरी देगा और इसके बाद इस नियम को संसद में चर्चा चल रहे एक नए कानून के ड्राफ्ट बिल में जोड़ दिया जाएगा.
स्पेन के प्रधानमंत्री ने प्रस्तावित बैन की घोषणा करते हुए कहा, "आज, हमारे बच्चे ऐसे डिजिटल माहौल में हैं, जिसे वे अकेले संभालने के लिए बने ही नहीं हैं. यह दुनिया लत, दुर्व्यवहार, अश्लील सामग्री, धोखाधड़ी और हिंसा से भरी पड़ी है.”
कई अन्य यूरोपीय देश भी 15-16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन पर विचार कर रहे हैं.
2025 के अंत में डेनमार्क ने बच्चों और युवाओं को ऑनलाइन दुर्व्यवहार से बचाने और "उनके डिजिटल जीवन के लिए बेहतर नियम बनाने का फैसला किया था.” डेनमार्क में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच हुए एक समझौते में माना गया कि कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बच्चों के लिए बैन होना चाहिए. हालांकि, ऐसा कोई कानून अभी तक लागू नहीं हुआ है.
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इटली ने भी संसद में एक बिल पेश किया है, जिसमें 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने का प्रस्ताव है. इसमें 15 साल से कम उम्र के चाइल्ड इन्फ्लुएंसर्स पर भी नियम लागू करने की बात कही गई है.
समाचार एजेंसी, रॉयटर्स से बात करने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ग्रीस भी ऐसा बैन लगाने के "बहुत करीब” है.
पिछले हफ्ते, पुर्तगाल ने एक कानून पेश किया, जिसमें कहा गया है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता की अनुमति लेनी होगी.
ऑस्ट्रिया भी सोशल मीडिया बैन पर विचार कर रहा है. जबकि यूनाइटेड किंगडम ने इस विषय पर लोगों और विशेषज्ञों से राय लेना शुरू कर दिया है.
जबकि यूरोपीय संसद के सांसदों ने नवंबर में पूरे यूरोप में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन की सिफारिश की थी. साथ ही, उनका सुझाव था कि 13 से 16 साल के बच्चों को माता-पिता की अनुमति के साथ सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है.
उम्र जांचने के लिए पूरे यूरोप में एक डिजिटल आईडी?
उम्र की पुष्टि करने के लिए एक सुझाव यह भी दिया गया है कि पूरे यूरोपीय संघ में एक डिजिटल आईडी सिस्टम बनाया जाए. ब्रसेल्स के थिंक टैंक ब्रूगेल के विशेषज्ञ पॉल ओ. रिक्टर ने कहा कि यह डिजिटल आईडी इस तरह बनाई जाएगी कि यूजर की उम्र जांची जा सके. लेकिन साथ ही उनकी निजी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहे.
उन्होंने कहा, "इससे लोग बिना अपना जन्मदिन, नाम, पता या आईडी नंबर जैसी निजी जानकारी साझा किए बिना साबित कर सकेंगे कि वह एक निश्चित उम्र से ऊपर हैं. इससे उम्र सीमा लागू करना आसान हो सकता है.”
लेकिन फ्रांस के युवा डिजिटल अधिकार संगठन, "कंट्रोल+आल्ट+रीक्लेम” के प्रवक्ता, मार्क डैमी ने दावा किया कि अभी तक यह साफ नहीं है कि उम्र जांचने वाले ऐप या डिजिटल आईडी कैसे काम करेंगे और यह लोगों की निजी जानकारी सुरक्षित रख भी पाएंगे या नहीं.
उन्होंने कहा, "इस तरह के बैन उल्टा असर का सकता है.” उन्होंने दावा किया, "हम मानते हैं कि यह एक समस्या है कि सोशल मीडिया मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर रहा है,” लेकिन इस तरह का बैन सिर्फ नेताओं का एक दिखावे का कदम है. यह कोई असल समाधान नहीं.
विशेषज्ञ: सोशल मीडिया बैन "मूल समस्याओं” का समाधान नहीं
फ्रांस के युवा डिजिटल अधिकार संगठन, "कंट्रोल+आल्ट+रीक्लेम” के प्रवक्ता, मार्क डैमी ने कहा कि सोशल मीडिया बैन करने से "असल समस्या हल नहीं होगी.” उन्होंने प्लेटफॉर्म की कुछ बड़ी समस्याओं की ओर इशारा किया. जैसे ऑटोप्ले फंक्शन, जिसमें वीडियो और ऑडियो अपने-आप चलने लगते हैं, जिससे यूजर अनचाहा कंटेंट देखने को मजबूर हो जाता है. इसके अलावा, लगातार स्क्रॉल करना ताकि कंटेंट खत्म ही न हो और लोग लगातार ऐप पर टिके रहें, जो यूजर में चिंता व तनाव पैदा कर देता है.
इसके अलावा, डैमी ने उम्र की सीमा पर भी आपत्ति जताई और कहा, "लत 15 या 16 साल की उम्र तक खत्म नहीं हो जाती है.”
रिक्टर भी मानते हैं कि अभी पर्याप्त रिसर्च नहीं है, जिससे यह तय किया जा सके कि सोशल मीडिया के लिए सही उम्र सीमा क्या होनी चाहिए. उन्होंने कहा, "सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना करने का सबसे ज्यादा असर खास तौर पर टीनएज लड़कियों पर पड़ता है. इस हिसाब से तो ज्यादा उम्र सीमा तय करने को भी सही ठहराया जा सकता है.”
केवल ईयू ही कर सकता है सोशल मीडिया कंपनियों को बड़े बदलाव लागू करने पर मजबूर
यूरोपीय संघ ने डिजिटल दुनिया में वयस्क होने की उम्र तय करने (डिजिटल एज ऑफ मेच्योरिटी) का समर्थन किया है. लेकिन उसने अपने सदस्य देशों को चेतावनी भी दी है कि वे ईयू के मुख्य कानून, डिजिटल सर्विसेज एक्ट (डीएसए) के साथ टकराव पैदा न करें. यह कानून टेक कंपनियों को यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य करता है कि उनके एल्गोरिदम और प्लेटफॉर्म बच्चों को नुकसान न पहुंचाएं.
यूरोपीय आयोग के टेक्नोलॉजी प्रवक्ता, थॉमस राग्नियर ने कहा, "डीएसए और यूरोपीय आयोग ही ऐसी संस्थाएं हैं, जो बड़े प्लेटफॉर्म्स पर अतिरिक्त नियम लागू कर सकती हैं.”
रिक्टर ने कहा कि ईयू के सदस्य देश निराश हैं. उन्हें लगता है कि ईयू विदेशी टेक कंपनियों (खासकर अमेरिकी कंपनियां) पर अपने नियम सही से लागू नहीं कर पा रहा है. रिक्टर के अनुसार, "डिजिटल सर्विसेज एक्ट बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स (जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया साइट्स) के लिए यह आवश्यक करता है कि वे अपने एल्गोरिदम और प्लेटफॉर्म डिजाइन में बदलाव करें, ताकि सिस्टम से होने वाले जोखिम, खासकर बच्चों के लिए कम हो सके.”
इसके अलावा, यह कानून मांग करता है कि कंपनियां शोधकर्ताओं के साथ डेटा साझा करें, ताकि सोशल मीडिया के खतरों पर स्वतंत्र रिसर्च हो सके. लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा, "लेकिन असल में, यह ठीक से लागू नहीं हो पाया है. जिस कारण सोशल मीडिया बैन करने जैसे ज्यादा सख्त प्रस्तावों को भारी समर्थन मिल रहा है.”
हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, एक्स के मालिक इलॉन मस्क ने स्पेन के प्रधानमंत्री को "तानाशाह और स्पेन के लोगों का गद्दार” करार दिया. यह बयान तब दिया गया जब स्पेन के प्रधानमंत्री ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन की योजना घोषित की. इसके जरिए मस्क ने यह दिखाने की कोशिश की कि यूरोप के ऑनलाइन सुरक्षा नियम असल में अभिव्यक्ति की आजादी को रोकने का बहाना है.
डैमी ने कहा कि अब समय आ गया है कि यूरोपीय देश मिलकर गैर-यूरोपीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के विकल्प तैयार करें. उन्होंने कहा, "हम बड़ी अमेरिकी कंपनियों के बंधक बन गए हैं.” उनके अनुसार, "या तो वह या फिर डिजिटल जीवन खत्म.”
यह विचार विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. उन्हें उम्मीद है कि अगर यूरोप की अपनी सोशल मीडिया कंपनियां होगी, तो वह ईयू के नियमों और मूल्यों का बेहतर पालन करेंगी.