मछली पकड़ने वाली चीनी नावों ने पर्यावरण से किया खिलवाड़
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

एक जांच में सुदूर इलाकों में मछलियां पकड़ने वाली चीनी नावों के पर्यावरण और मानवाधिकार की गंभीर अनदेखी के मामले सामने आए हैं. इन पर मछुआरों को सड़ा खाना और पीने के लिए समुद्र का ठीक से साफ ना किया गया पानी दिया जाता था."चीन की मछली पकड़ने वाली नावों पर आराम जैसा कोई शब्द ही नहीं होता. अगर बहुत ज्यादा मछलियां हुईं तो काम 22 घंटे भी चल सकता है", यह बात ऐसी नावों पर रहे एक पूर्व क्रू सदस्य ने एंवायर्नमेंटल जस्टिस फाउंडेशन (ईजेएफ) के जांचकर्ता समूह से कही है.

लंदन स्थित एंवायर्नमेंटल जस्टिस फाउंडेशन को दिया यह बयान हाल ही में उनकी ओर से छापी गई एक रिपोर्ट का हिस्सा है. यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे दक्षिण-पश्चिमी हिंद महासागर के इलाके में चीन की मछली पकड़ने वाली नावें पर्यावरण और मानवाधिकार से जुड़े नियमों का उल्लंघन कर रही हैं.

मछली पकड़ने के उद्योग में चीन दुनिया के सबसे प्रमुख देशों में शामिल है. और सुदूर इलाकों में मछली पकड़ने के मामले में यह सबसे प्रमुख देश है. यह सबसे ज्यादा मछलियां भी पकड़ता है और इसके लिए सबसे बड़े जहाज भी भेजता है. इलीगल, अनरिपोर्टेड एंड अनरेग्युलेटेड (आईयूयू) फिशिंग इंडेक्स के मुताबिक 152 देशों में चीन, उल्लंघनों के मामले में सबसे खराब है.

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ईजेएफ की रिपोर्ट पूर्वी अफ्रीकी तट पर चीन की ओर से चल रही मछली पकड़ने से जुड़ी अवैध गतिविधियों की गहन जांच करने वाली पहली रिपोर्ट है. इससे पहले सुदूर इलाकों में मछली पकड़ने वाली चीनी नावों को दक्षिणी अमेरिका और पश्चिमी अफ्रीका में अवैध गतिविधियों के चलते जांच का सामना करना पड़ा है.

अवैध तरीके से मछली पकड़ने की चीनी व्यवस्था

पूर्वी अफ्रीकी तट पर अवैध तरीके से मछली पकड़ने के मामले में चीन अकेला देश नहीं है लेकिन यह सबसे बड़े दोषियों में से एक जरूर है. मेडागास्कर और मोजाम्बिक जैसे पूर्वी अफ्रीकी देश ऐसी गतिविधियों से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब चीन पूर्वी अफ्रीका के तटीय देशों के साथ मिलकर मछली पकड़ने का बुनियादी तंत्र बना रहा है.

ईजेएफ ने रिपोर्ट के लिए हिंद महासागर में चीनी नौकाओं पर काम कर चुके 44 मछुआरों का इंटरव्यू किया. चीनी नावों पर अवैध गतिविधियों के बारे में पूछे जाने पर उनमें से 80 फीसदी ने शार्क के फिन निकालकर मरी शार्क को फिर पानी में फेंकने की बात कही. 59 फीसदी ने जानबूझकर बड़े समुद्री जीवों जैसे मांटा रे, डॉल्फिनों और शार्कों को नुकसान पहुंचाने की बात बताई.

ईजेएफ के सीनियर रिसर्चर कैलम नोलन ने बताया कि स्थानीय मछुआरों के लिए सुरक्षित इलाकों में चीनी नावों की घुसपैठ भी एक बड़ी समस्या है. वो बताते हैं कई बार रात के समय चीन की बड़ी नावें इस इलाके में घुस आती हैं, जिससे उनकी मछुआरों की छोटी नावों से टक्कर हो जाती है.

नोलन ने कहा, यह स्थानीय लोगों के लिए बड़ी समस्या खड़ी करता है. वो कहते हैं कि इससे स्थानीय मछुआरों को कई बार हफ्तों तक अपना काम बंद करना पड़ता है और कई बार उनकी नावें बनने में महीनों लग जाते हैं.

सड़ा खाना और समुद्र का साफ किया पानी

सुदूर इलाकों में मछली पकड़ने वाली चीनी नावों में बड़ी संख्या में विदेशी मछुआरे, खासकर इंडोनेशिया और फिलीपींस के मछुआरे भर्ती किए जाते हैं. इंडोनेशियन माइग्रेंट वर्कर्स यूनियन एसबीएमआई के कॉर्डिनेटर डियोस लुंबन गाओल ने डीडब्ल्यू को बताया कि ईजेएफ की रिपोर्ट इंडोनेशियाई क्रू सदस्यों के शोषण, उनके प्रति हिंसा और कठिन काम की परिस्थितियों पर विस्तार से बात करती है और ऐसी परिस्थितियां अब भी मौजूद हैं.

जिन 44 क्रू सदस्यों का ईजेएफ ने इंटरव्यू किया, उन सभी ने इन नावों पर रहने और काम के प्रति शोषण वाली स्थितियों की बात कही. 96 फीसदी ने कहा कि उनसे ज्यादा काम लिया जाता था, जबकि 55 फीसदी ने मारपीट किए जाने की बात कही. साल 2017 से 2023 के बीच चीनी टूना लॉन्गलाइनर्स नौकाओं पर सवार लोगों ने चार मौतों की बात भी बताई.

गाओल ने कहा कि ऐसी रिपोर्ट्स आई हैं, जिनमें बताया गया है कि इंडोनेशिया के क्रू सदस्यों को पीने के लिए ठीक से साफ ना किया गया समुद्री पानी और खाने के लिए खराब हो चुका डिब्बाबंद खाना दिया गया. वहीं नाव के चीनी कैप्टन और क्रू सदस्य मिनलर वॉटर पी रहे थे.

हिंद महासागर पर अपनी पकड़ मजबूत करता चीन

ईजेएफ की रिपोर्ट में चीन की ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट स्कीम, बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव का जिक्र भी किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बीआरआई के तहत निवेश पाने वाले पूर्वी अफ्रीकी देशों के संसाधनों पर चीन का दखल बढ़ा है.

2013 में बीआरआई के लॉन्च के बाद से अब तक 52 अफ्रीकी देश इसमें शामिल हो चुके हैं. इस प्रोजेक्ट के जरिए चीन ने अफ्रीका में सड़कें, रेल लाइन और बंदरगाह बनाकर अपनी पहुंच को बढ़ाया है.

चीनी सरकार, अवैध और गैर-कानूनी तरीकों से मछली पकड़ने के आरोपों से बार-बार इंकार करती रही है. साल 2023 में सरकार ने एक सुदूर इलाकों में मछली पकड़ने से जुड़े मामलों पर एक श्वेतपत्र जारी किया था. इसमें कहा गया था कि अवैध मछली पकड़ने के मामले में चीन जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन करता है और चीन में सुदूर मछली पकड़ने वाली नावों को लेकर सबसे कठोर मैनेजमेंट के नियम और नीतियां हैं.

यूचेन ली/चिया-चुन ये