अमेरिका-इस्राएल ने ईरान की दो सबसे बड़ी स्टील फैक्ट्रियों पर हमले किए. इनसे ईरान की जंग लड़ने की ताकत तो कम होगी ही, एक बड़ा खतरा यह भी है कि देश की अर्थव्यवस्था को ऐसा गहरा जख्म मिल सकता है जिसे शायद कभी न भरा जा सके.इस्फहान में मोबारकेह स्टील और अहवाज में खुजेस्तान स्टील, ईरान के दो सबसे बड़े स्टील उत्पादक हैं. युद्ध के दौरान इनपर हुई बमबारी ने ईरान में एक तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है. इन हमलों ने ईरान के लोगों को झकझोर दिया है. बहस का मुख्य मुद्दा यह है कि क्या इन दो बड़ी फैक्ट्रियों को निशाना बनाना सही था? क्या इन्हें वाकई सैन्य निशाना मानकर हमला किया जाना चाहिए था?
कुछ लोगों ने दलील दी कि ये स्टील प्लांट प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर उस आर्थिक नेटवर्क से जुड़े थे, जिनसे सरकार और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) को पैसा मिलता है. वहीं, दूसरा पक्ष इसे नागरिक औद्योगिक बुनियादी ढांचे पर हमला मान रहा है. वह भी ऐसे समय में, जब ईरान पहले से ही अमेरिका और इस्राएल की बमबारी के कारण भारी दबाव में है.
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बहुत कम लोग इस बात से चिंतित हैं कि ईरान के स्टील उद्योग को बर्बाद करने का भविष्य में क्या असर होगा. बता दें कि स्टील सेक्टर, ईरान के सबसे अहम औद्योगिक क्षेत्रों में से एक है. यह देश की अर्थव्यवस्था के सबसे अहम स्तंभों में शामिल है.
भले ही ईरान की अर्थव्यवस्था तेल पर बहुत अधिक आश्रित हो, लेकिन 2025 में यह कच्चे स्टील के शीर्ष उत्पादकों में भी शामिल था. 'वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन' के मुताबिक, ईरान का सालाना उत्पादन करीब 3.18 करोड़ टन रहा. कंपनी से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार, अकेले मोबारकेह स्टील ने ही मार्च 2025 से जनवरी 2026 के बीच विदेशों में माल बेचकर करीब 86 करोड़ डॉलर कमाए.
ईरान की निर्यात क्षमता को झटका
इतने विशाल कारखाने पर हवाई हमला करने का असर सिर्फ सेना के नुकसान तक सीमित नहीं है. यह ईरान की समूची सप्लाई चेन, हजारों मजदूरों की नौकरियों और निर्यात पर भी एक करारी चोट है. यह ईरान के उन गिने-चुने सेक्टरों में है, जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बोझ के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती से थामे हुए था. इस लिहाज से, स्टील प्लांट पर हमला देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है.
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अभी यह पूरी तरह साफ नहीं है कि असल में कितना नुकसान हुआ है, क्योंकि इसकी स्वतंत्र जांच नहीं हो पाई है. जो भी जानकारी मिल रही है, वह या तो ईरान की खबरों से आ रही है या बाजार के जानकारों से. लेकिन मोटे तौर पर जो तस्वीर उभर रही है, उससे यह पता चल रहा है कि नुकसान बहुत बड़ा और गंभीर है.
आर्गस मीडिया, वैश्विक ऊर्जा और उपयोगी वस्तुओं के बाजारों के बारे में जानकारी देने वाला एक संगठन है. उसने बताया है कि इन हमलों में खुजेस्तान स्टील और मोबारकेह के गोदामों के साथ-साथ बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचों को काफी नुकसान पहुंचा है. रिपोर्ट में अंदेशा जताया गया है कि हमले के कारण अब ईरान का स्टील उत्पादन कम हो जाएगा और दूसरे देशों को माल बेचने की उसकी क्षमता भी प्रभावित होगी.
'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने खबर दी कि खुजेस्तान स्टील ने कामकाज रोक दिया है. वहीं, मोबारकेह में नुकसान पहुंचने के बावजूद उत्पादन चालू है.
स्टील बनाने के लिए बिजली की लगातार आपूर्ति बेहद जरूरी है. अगर बिजली के सबस्टेशन या फैक्ट्री के अपने पावर प्लांट पर या प्रॉडक्शन लाइनों पर हमला होता है, तो असर सिर्फ टूटी हुई मशीनों तक सीमित नहीं रहता. बिजली कटने से पूरी फैक्ट्री का काम रुक जाता है और गर्म लोहा मशीनों में ही जम सकता है, जिससे करोड़ों का नुकसान हो सकता है.
ईरान में अर्थव्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद हुई धुंधली
ईरान के एक अर्थशास्त्री ने डीडब्ल्यू को बताया कि यह युद्ध जितना लंबा चलेगा, उतना ही ज्यादा पैसा और सरकारी संसाधन विकास के कामों से हटाकर जंग में लगा दिए जाएंगे. इससे पहले ही संकट में फंसी ईरान की अर्थव्यवस्था को संभालना और भी मुश्किल हो जाएगा. अर्थशास्त्री ने अपना नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि इसके गहरे असर शायद युद्ध खत्म होने के बाद ज्यादा साफ नजर आएंगे.
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मौजूदा हालात ये हैं कि ईरान पर चौतरफा मार पड़ रही है. एक तरफ युद्ध की वजह से नुकसान हो रहा है, तो दूसरी तरफ पाबंदियां, महंगाई और लंबे समय से कायम आर्थिक कुप्रबंधन. एक सूत्र ने चेताया कि अगर बिना किसी राजनीतिक बदलाव के युद्ध खत्म हो गया और आर्थिक पाबंदियां जारी रहीं, तो देश के कई कुशल कामगार ईरान छोड़कर जा सकते हैं. इससे ईरानी अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करना और भी मुश्किल हो जाएगा.
अमेरिका-इस्राएल के हमलों से अरबों डॉलर का सीधा नुकसान
अर्थशास्त्री हसन मंसूर ने डीडब्ल्यू को बताया कि इन हमलों के बारे में जो रिपोर्ट आ रही हैं, उनसे पता चलता है कि फैक्ट्रियों के बिजली पैदा करने वाले हिस्सों पर सीधा हमला हुआ है. इसके अलावा, लोहे और स्टील बनाने वाली वर्कशॉप के कुछ हिस्सों और अलॉय स्टील बनाने वाली मशीनों को भी काफी नुकसान पहुंचा है.
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उन्होंने कहा कि सीधा नुकसान पांच अरब से छह अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इस भारी-भरकम आर्थिक क्षति के अलावा, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को जो व्यापक नुकसान पहुंचेगा उसका दायरा कहीं ज्यादा विस्तृत हो सकता है. इसका असर निर्माण, विनिर्माण और कई अन्य संबंधित क्षेत्रों तक फैल सकता है.
यह आकलन दिखाता है कि ईरान के लिए धातु क्षेत्र कितना महत्वपूर्ण है. ईरान की सरकार के लिए स्टील और धातुओं का कारोबार बहुत मायने रखता है. अमेरिकी ट्रेजरी का लंबे समय से यह मानना है कि ईरान का स्टील उद्योग सरकार की कमाई का बड़ा स्रोत है. साल 2020 में अमेरिका ने मोबारकेह स्टील से जुड़ी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे और बताया था कि ईरान की मेटल इंडस्ट्री निर्यात के रास्ते अरबों डॉलर की कमाई करता है.
क्या ईरान के स्टील उत्पादन के लिए वापसी का कोई रास्ता नहीं है?
आर्थिक विश्लेषक अलीरेजा सलावती का मानना है कि अगर नुकसान बहुत ज्यादा नहीं हुआ है, तो कुछ ही महीनों में क्षतिग्रस्त इकाइयों की तकनीकी मरम्मत की जा सकती है. यह कहने के साथ ही अलीरेजा ने बताया कि ज्यादा गंभीर समस्या कहीं और है.
उनके मुताबिक, स्टील उद्योग के कुछ हिस्सों में मुनाफा बहुत ही कम होता है. अगर ऐसे हिस्से बुरी तरह तबाह हो जाते हैं, तो उन्हें फिर खड़ा करने का कोई फायदा नहीं रह जाता. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में टूटी हुई मशीनों को ठीक करने के बजाय, बाहर से स्टील मंगाना ज्यादा सस्ता और समझदारी भरा काम हो सकता है.
इसी से समझ आता है कि आने वाले समय में कितनी बड़ी मुसीबत आ सकती है. हवाई हमलों में जो टूट-फूट दिख रही है, वह तो बस शुरुआत है. असली नुकसान तब होगा, जब इन टूटी हुई मशीनों और इकाइयों को कभी ठीक ही ना किया जा सके. इससे स्टील का उत्पादन कम हो जाएगा और धीरे-धीरे माल की सप्लाई ठप होने लगेगी.
लोगों की रोजीरोटी दांव पर
इसका असर सिर्फ फैक्ट्री पर ही नहीं, बल्कि वहां काम करने वाले लोगों की जिंदगी पर भी पड़ेगा. 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने बताया कि खुजेस्तान स्टील में करीब 10,000 मजदूर काम करते हैं. इनमें से ज्यादातर ठेके पर हैं, जिनकी नौकरी कभी भी जा सकती है. अगर काम लंबे समय तक बंद रहा, तो सिर्फ इन मजदूरों का ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी छोटी कंपनियों और दूसरे धंधों का भी बुरा हाल हो जाएगा.
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वर्षों से ईरान ने तेल के अलावा कमाई के लिए स्टील और दूसरी धातुओं को अपना सबसे बड़ा सहारा बनाया हुआ है. यह भी एक वजह है कि इस सेक्टर पर बार-बार पाबंदियां लगाई जाती रही हैं. इन हमलों की अहमियत सिर्फ जंग तक सीमित नहीं है. इन्होंने उस जगह चोट की है जहां से ईरान को पैसा, निर्यात और हजारों लोगों को नौकरियां मिलती हैं.
आम ईरानियों के लिए इन हमलों का मतलब सिर्फ दो फैक्ट्रियों में नुकसान भर नहीं है. वे जानते हैं कि ये हमले सीधे उस जड़ पर हुए हैं, जो देश के समूचे उद्योगों को जिंदा रखती है. स्टील सेक्टर एक ऐसी कड़ी है, जिससे हजारों कारखाने और लाखों नौकरियां जुड़ी हुई हैं. अब उस कड़ी के टूटने का डर सबको सता रहा है.
अगर स्टील सेक्टर की हालत और ज्यादा बिगड़ती है, तो इसका असर सिर्फ कारखानों के अंदर नहीं रहेगा. यह मुसीबत फैक्ट्री से बाहर निकलकर पूरे देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ेगी.क्या ईरान युद्ध से पश्चिम एशिया में शुरू हो जाएगी परमाणु हथियार बनाने की होड़?












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