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NASA Curiosity Rover Discovery: मंगल ग्रह पर मिला मधुमक्खी के छत्ते जैसी आकृतियों का विशाल मैदान; नासा के क्यूरियोसिटी रोवर की नई खोज

नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल ग्रह के गेल क्रेटर में माउंट शार्प की ढलानों पर मधुमक्खी के छत्ते जैसी बहुकोणीय आकृतियों का एक विशाल मैदान खोजा है. वैज्ञानिक इस खोज को मंगल के प्राचीन जल प्रवाह और भूगर्भीय इतिहास को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं.

NASA Curiosity Rover Discovery: मंगल ग्रह पर मिला मधुमक्खी के छत्ते जैसी आकृतियों का विशाल मैदान; नासा के क्यूरियोसिटी रोवर की नई खोज
NASA के क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल ग्रह पर 'हनीकॉम्ब' टेक्सचर का एक बड़ा क्षेत्र खोजा (Photo Credits: X/@NASAMars)

वाशिंगटन: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के क्यूरियोसिटी रोवर (Curiosity Rover) ने मंगल ग्रह की सतह पर एक अनूठी भूगर्भीय संरचना की खोज की है. रोवर ने मंगल ग्रह के 'गेल क्रेटर' (Gale Crater) में स्थित 'माउंट शार्प' की निचली ढलानों पर एक घाटी 'वैले ग्रांडे' (Valle Grande) की खोजबीन के दौरान मधुमक्खी के छत्ते (Honeycomb) जैसी बहुकोणीय दरारों (Polygonal Fractures) का एक विशाल क्षेत्र देखा है.

नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार, यह रोवर मिशन द्वारा अब तक देखा गया अपनी तरह का सबसे बड़ा और व्यापक बहुकोणीय दरारों का क्षेत्र है, जो लाल ग्रह के प्राचीन पर्यावरण और जलवायु इतिहास पर नया प्रकाश डालता है. यह भी पढ़ें: Bharatiya Antariksh Hackathon 2026: इसरो ने लॉन्च किया 'भारतीय अंतरिक्ष हैकाथॉन 2026'; जानें पात्रता, महत्वपूर्ण तारीखें और आवेदन का तरीका

क्यूरियोसिटी मिशन का अब तक का सबसे बड़ा 'पॉलीगॉन फील्ड'

क्यूरियोसिटी रोवर ने अपने 4,930वें और 4,931वें मंगल दिवस (Sols) के दौरान इस दृश्य का एक 360-डिग्री पैनोरमा चित्र कैप्चर किया. इन तस्वीरों में लगभग 4 से 8 सेंटीमीटर (1.5 से 3 इंच) व्यास वाली हजारों छोटी ज्यामितीय दरारें दिखाई दे रही हैं, जो हर दिशा में दूर-दूर तक फैली हुई हैं.

यह अनोखी आकृतियां पास में स्थित 'मिराफ्लोरेस' (Miraflores) नामक एक 20 फीट ऊंची रेत से ढकी पहाड़ी तक फैली हुई हैं. यद्यपि रोवर ने पहले भी ऐसी आकृतियों के छोटे पैच देखे थे, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में इनका एक साथ मिलना अभूतपूर्व है.

NASA के क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल ग्रह पर मधुमक्खी के छत्ते जैसी बनावट वाला एक विशाल क्षेत्र खोजा है.

प्राचीन पानी और जलवायु परिवर्तन के संकेत

वैज्ञानिकों का मानना है कि ये बहुकोणीय आकृतियां अरबों साल पहले मंगल ग्रह पर मौजूद पानी और मौसमी स्थितियों के बारे में बहुमूल्य सुराग दे सकती हैं.

अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार, इन आकृतियों के बनने के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

  • कीचड़ के सूखने से दरारें: यह संरचनाएं प्राचीन काल में गीली मिट्टी या कीचड़ के सूखने और सिकुड़ने से बनी हो सकती हैं.
  • तापमान में बदलाव: बार-बार गर्म और ठंडे मौसम के चक्र के कारण चट्टानों में ऐसी दरारें आ सकती हैं.
  • दबाव और अवसादन: नीचे दबे अवसादों के अत्यधिक दबाव के कारण पानी बाहर निकलने से भी ऐसी ज्यामितीय आकृतियां बन सकती हैं.

14 साल से जारी खोज यात्रा

अगस्त 2012 में गेल क्रेटर में उतरे क्यूरियोसिटी रोवर ने अपने लगभग 14 साल के सफर में मंगल ग्रह पर प्राचीन नदियों, झीलों, सल्फर क्रिस्टल और कार्बनिक अणुओं (Organic Molecules) की मौजूदगी के साक्ष्य एकत्र किए हैं.

नासा के वैज्ञानिक अब रोवर के उपकरणों की मदद से इन पॉलीगॉन आकृतियों की खनिज संरचना और रासायनिक तत्वों का विश्लेषण कर रहे हैं, ताकि यह समझा जा सके कि मंगल ग्रह एक जल-समृद्ध ग्रह से आज के ठंडे व शुष्क वातावरण में कैसे परिवर्तित हुआ.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 31, 2026 08:40 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).