भारत के श्रीनिवास गौड़ा ने भैंसो की रेस में किया कमाल, केवल 9.55 सेकंड में पूरा किया 100 मीटर का फासला, लोग कर रहे हैं उसैन बोल्ट से तुलना
जब रेस और स्प्रिंट जीतने की बात आती है, तो हम सभी जानते हैं कि कोई भी जमैका (Jamaica) के उसेन बोल्ट को नहीं हरा सकता है. कई मौकों पर बोल्ट कम नहीं रहे हैं और महज 9.58 सेकंड में 100 मीटर की दूरी तय करने का रिकॉर्ड बनाए हुए हैं. हालांकि, कंबाला के श्रीनिवास गौड़ा ने उसेन बोल्ट से ज्यादा रन बनाए. गौड़ा ने 9.55 सेकेंड में 100 मीटर की दूरी तय की और वो भी कीचड़ से भरे मैदान में.
जब रेस और स्प्रिंट जीतने की बात आती है, तो हम सभी जानते हैं कि कोई भी जमैका (Jamaica) के उसेन बोल्ट (Usain Bolt) को नहीं हरा सकता है. कई मौकों पर बोल्ट (Bolt) कम नहीं रहे हैं और महज 9.58 सेकंड में 100 मीटर की दूरी तय करने का रिकॉर्ड बनाए हुए हैं. हालांकि, कंबाला (Kambala) के श्रीनिवास गौड़ा (Srinivasa Gowda) ने उसेन बोल्ट से ज्यादा रन बनाए. गौड़ा ने 9.55 सेकेंड में 100 मीटर की दूरी तय की और वो भी कीचड़ से भरे मैदान में. गौड़ा ने कुल 142.5 मीटर की दूरी केवल 13.62 सेकंड में पूरी की. यह दौड़ 2 फरवरी, 2020 को हुई थी. कंबाला रेस एक बफैलो रेस है जो कीचड़ से भरे धान के खेत (Slushy Paddy Field) में होती है.
कंबाला कर्नाटक की दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों के कृषक समुदाय में एक पारंपरिक वार्षिक बफैलो रेस है. इस रिकॉर्ड के बारे में एक ट्वीट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. श्रीनिवास ने इस साल 12 कंबाला रेस में भाग लिया है, जिसमें उन्होंने 29 पुरस्कार जीते हैं. इसके साथ ही उन्होंने 30 साल पुराना एक रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है जो कि बेलथांगडी (Belthangady) के पास अलदांगडी (Aladangadi) में बनाया गया था. स्थानीय मीडिया ने पहले ही 28 वर्षीय श्रीनिवास की प्रशंसा की है.
देखें ट्वीट:
He is Srinivasa Gowda (28) from Moodabidri in Dakshina Kannada district. Ran 142.5 meters in just 13.62 seconds at a "Kambala" or Buffalo race in a slushy paddy field. 100 meters in JUST 9.55 seconds! @usainbolt took 9.58 seconds to cover 100 meters. #Karnataka pic.twitter.com/DQqzDsnwIP
— DP SATISH (@dp_satish) February 13, 2020
गौड़ा के बारे में बात करें तो वह स्कूल छोड़ने के बाद कंस्ट्रक्शन मजदूर के रूप में काम करते हैं. उन्होंने पांच या छह साल पहले ये खेल खेलने की शुरुआत की थी. वह मिज़ार के शक्ति प्रसाद, इरुवेल के बाड़ा पूजारी के हर्षवर्धन के स्वामित्व वाली तीन सांडों के जॉकी हैं. टूर्नामेंट शुरू होने से पहले जॉकी को लगभग एक महीने का प्रशिक्षण मिलता है. अगर बफैलो किसी दौड़ में जीत जाता है तो जॉकी को नकद पुरस्कार से भी नवाजा जाता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Feb 14, 2020 12:02 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

