इंग्लैंड में ट्रांसजेंडर महिलाओं के खेलने पर लगा प्रतिबंध, महिला फुटबॉल टीम में नहीं हो सकती शामिल

इंग्लैंड के फुटबॉल संघ (FA) ने 1 जून से ट्रांसजेंडर महिलाओं को महिला फुटबॉल में खेलने से प्रतिबंधित कर दिया है, इसका कारण सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, जिसमें "महिला" शब्द को केवल जैविक महिलाओं तक सीमित किया गया.

Transgender Women Football Ban: इंग्लैंड में महिला फुटबॉल के लिए एक बड़ा बदलाव किया गया है. 1 जून से, ट्रांसजेंडर महिलाओं को महिला फुटबॉल में खेलने की अनुमति नहीं होगी. इंग्लैंड के फुटबॉल संघ (FA) ने इस फैसले की घोषणा की है. इस बदलाव का कारण है सुप्रीम कोर्ट का वह फैसला, जिसमें कहा गया था कि "महिला" शब्द केवल जैविक महिलाओं के लिए है, न कि ट्रांसजेंडर महिलाओं के लिए.

फैसले में बदलाव

इंग्लैंड में इससे पहले फुटबॉल संघ ने ट्रांसजेंडर महिलाओं को महिला फुटबॉल में खेलने की अनुमति दी थी, बशर्ते उनके टेस्टोस्टेरोन स्तर को 5 नैनोमोल प्रति लीटर (n/mol) से कम रखा जाए, और यह स्थिति कम से कम 12 महीने तक बनी रहे. लेकिन, दो दिन पहले स्कॉटिश फुटबॉल संघ ने ट्रांसजेंडर महिलाओं पर महिला फुटबॉल में खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया. इसके बाद FA ने अपने फैसले को पलटते हुए, कानूनी सलाह के बाद यह नया कदम उठाया.

एफए का बयान

फुटबॉल संघ ने कहा, "हमारा काम है कि फुटबॉल को जितना हो सके उतने लोगों के लिए उपलब्ध बनाना, लेकिन यह भी जरूरी है कि हम कानून और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल नीति के दायरे में रहकर काम करें. हमारी वर्तमान नीति, जिसमें ट्रांसजेंडर महिलाओं को महिला फुटबॉल में खेलने की अनुमति थी, इसे विशेषज्ञ कानूनी सलाह पर आधारित किया गया था."

एफए ने यह भी कहा कि यह एक जटिल विषय है, और अगर कानून, विज्ञान या नीति में कोई महत्वपूर्ण बदलाव हुआ तो वे इसे फिर से देखेंगे और जरूरत के अनुसार बदलेंगे. 16 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, फुटबॉल संघ को अपनी नीति बदलनी पड़ी.

प्रभावित खिलाड़ी

इस फैसले का असर इंग्लैंड में 20 पंजीकृत ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों पर पड़ेगा. फुटबॉल संघ ने कहा कि वह इन खिलाड़ियों से संपर्क करेगा और उन्हें इस बदलाव के बारे में बताएगा. संघ ने कहा, "हम समझते हैं कि यह उन लोगों के लिए कठिन होगा जो अपने पहचान के अनुसार खेलना चाहते हैं. हम इन खिलाड़ियों से संपर्क कर उन्हें समझाएंगे कि वे किस तरह से खेल से जुड़े रह सकते हैं."

इस फैसले को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. एक ओर जहां इसे कानून और नीति के अनुरूप बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे ट्रांसजेंडर समुदाय के खिलाफ भेदभाव माना जा रहा है. ऐसे में यह सवाल उठता है कि खेलों में समानता और विविधता को कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है, खासकर जब इसमें जेंडर के आधार पर भेदभाव की बात की जाए.

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