Amit Mishra On Dhoni: क्या एमएस धोनी ने खाया इन खिलाड़ियों का करियर? अमित मिश्रा ने करियर को लेकर फैली अफवाहों पर तोड़ी चुप्पी
अमित मिश्रा ने कहा कि लोग कहते हैं अगर धोनी कप्तान नहीं होते तो उनका करियर बेहतर होता, लेकिन सच्चाई यह है कि अगर धोनी नहीं होते तो शायद वह टीम इंडिया में होते ही नहीं. उन्होंने बताया कि उनका टीम में आना और बार-बार वापसी करना धोनी की कप्तानी में ही संभव हुआ. कप्तान के तौर पर धोनी ने उन पर भरोसा दिखाया और उसी वजह से उन्हें बार-बार मौके मिलते रहे.
Amit Mishra On Dhoni: पूर्व भारतीय स्पिनर अमित मिश्रा(Amit Mishra) ने अपने करियर को लेकर लंबे समय से चल रही उन अफवाहों पर खुलकर बात की है, जिनमें कहा जाता रहा कि अगर एमएस धोनी(MS Dhoni) कप्तान नहीं होते तो उनका अंतरराष्ट्रीय करियर और लंबा हो सकता था. अमित मिश्रा ने साफ कहा है कि इस बात को नकारात्मक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि हकीकत में धोनी की कप्तानी में ही उन्हें टीम इंडिया में लगातार मौके मिले. अमित मिश्रा ने साल 2003 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे मैच से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था. इसके बाद उन्होंने भारत के लिए 22 टेस्ट, 36 वनडे और 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले. उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ बेंगलुरु में खेला गया तीसरा टी20 था, जिसमें उन्होंने चार ओवर में 23 रन देकर एक विकेट लिया था. अमित मिश्रा ने 2025 में आधिकारिक रूप से क्रिकेट से संन्यास लिया. कौन हैं पीयूष चावला? भारतीय क्रिकेट का 'लकी चार्म', 35 मैच खेले और 2 विश्व कप जीत लिए
2017 के बाद अमित मिश्रा का करियर लगभग थम सा गया, जिसकी बड़ी वजह टीम में युजवेंद्र चहल( Yuzvendra Chahal) का उभरना माना जाता है. इसी को लेकर अक्सर यह चर्चा होती रही कि धोनी की कप्तानी में उन्हें सीमित मौके मिले. लेकिन MenXP पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान मिश्रा ने इस सोच को पूरी तरह खारिज कर दिया.
अमित मिश्रा ने क्या कहां?
अमित मिश्रा ने कहा कि लोग कहते हैं अगर धोनी कप्तान नहीं होते तो उनका करियर बेहतर होता, लेकिन सच्चाई यह है कि अगर धोनी नहीं होते तो शायद वह टीम इंडिया में होते ही नहीं. उन्होंने बताया कि उनका टीम में आना और बार-बार वापसी करना धोनी की कप्तानी में ही संभव हुआ. कप्तान के तौर पर धोनी ने उन पर भरोसा दिखाया और उसी वजह से उन्हें बार-बार मौके मिलते रहे.
मिश्रा ने यह भी याद किया कि धोनी से मिले एक छोटे से सुझाव ने उनके करियर के सबसे यादगार मुकाबलों में से एक को जन्म दिया. साल 2016 में न्यूजीलैंड के खिलाफ उनका आखिरी वनडे मैच था. भारत ने उस मुकाबले में करीब 260–270 रन बनाए थे और मैच कड़ा था. गेंदबाजी के दौरान अमित मिश्रा रन रोकने पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे, विकेट लेने की सोच पीछे चली गई थी.
मिश्रा के मुताबिक, तभी धोनी उनके पास आए और कहा कि वह अपनी नैचुरल गेंदबाजी नहीं कर रहे हैं. धोनी ने उन्हें ज्यादा सोचने से मना किया और वही गेंदबाजी करने को कहा, जो वह हमेशा करते आए हैं। इसके बाद मिश्रा ने अपनी लय बदली और मैच का रुख पूरी तरह पलट दिया. उस मुकाबले में अमित मिश्रा ने सिर्फ छह ओवर में 18 रन देकर पांच विकेट झटके और न्यूजीलैंड की पूरी टीम 79 रन पर सिमट गई. भारत ने यह मैच 190 रन से जीता. इस शानदार प्रदर्शन के लिए अमित मिश्रा को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया और उन्होंने पांच मैचों की उस सीरीज में कुल 15 विकेट लेकर प्लेयर ऑफ द सीरीज का खिताब भी जीता.
अमित मिश्रा 2013 की आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा रहे. इसके अलावा 2014 टी20 वर्ल्ड कप में उन्होंने 10 विकेट झटके, जहां भारत फाइनल तक पहुंचा था. साल 2013 में जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने एकदिवसीय द्विपक्षीय सीरीज में 18 विकेट लेकर Javagal Srinath के विश्व रिकॉर्ड की भी बराबरी की थी. अमित मिश्रा का मानना है कि करियर को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगाने से बेहतर है कि चीजों को सकारात्मक नजरिए से देखा जाए.