उच्चतम न्यायालय ने बेनामी लेन-देन निवारण अधिनियम 1988 के प्रावधान को रद्द किया, जिसमें बेनामी लेन-देन में लिप्त पाए जाने पर अधिकतम 3 वर्ष के कारावास और जुर्माने अथवा दोनों दण्ड देने का प्रावधान था। इस प्रावधान को स्पष्ट रूप से मनमाना होने के आधार पर असंवैधानिक करार दिया। pic.twitter.com/a3Gyt92VxM— आकाशवाणी समाचार (@AIRNewsHindi) August 23, 2022
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