#केरल उच्च न्यायालय ने कहा कि अदालतें राज्यपाल के कार्यों पर गौर कर सकती हैं।
अदालत की यह टिप्पणी तब आई जब केरल विश्वविद्यालय के 15 मनोनीत सीनेट सदस्यों द्वारा एक याचिका दायर की गई, जिसमें कहा गया था कि उन्हें चांसलर, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने बिना सुनवाई के हटा दिया था। pic.twitter.com/vX8v8c0ktw— IANS Hindi (@IANSKhabar) October 21, 2022
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