Jaipur Lakhi Mela 2026: जब 'हलवाई' बनी जेसीबी मशीन! 651 क्विंटल चूरमा बनाने का वीडियो हुआ वायरल
जयपुर के पास कुहाड़ा में छापाला भैरू जी के लक्खी मेले में आस्था और तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिला. यहां 65,000 किलो से अधिक चूरमा बनाने के लिए जेसीबी मशीनों का उपयोग किया गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है.
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Jaipur Lakhi Mela 2026: राजस्थान (Rajasthan) अपनी अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है, लेकिन जयपुर के निकट कुहाड़ा गांव में आयोजित 'छापाला भैरू जी लक्खी मेले' (Chapala Bhairu Ji Lakhi Fair) ने आधुनिक मशीनरी और आस्था के मेल की एक नई मिसाल पेश की है. इस वर्ष मेले के महाप्रसाद (Maha Prasad) के लिए 651 क्विंटल (65,100 किलोग्राम) चूरमा (Churma) तैयार किया गया. इतनी भारी मात्रा में चूरमे को मिलाने के लिए पारंपरिक कड़छियों के बजाय जेसीबी (JCB) मशीनों का सहारा लिया गया, जिसका वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल (Viral Video) हो रहा है और यह लोगों का ध्यान अपनी तरफ तेजी से आकर्षित कर रहा है. यह भी पढ़ें: VIDEO: युवक का दावा, Bitcoin से कमाए 30,000 करोड़, सनातन धर्म में 15,000 करोड़ रुपये दान करने की जताई इच्छा; अनीरुद्धाचार्य महाराज ने दिया यह जवाब
मशीनों से बना 65 टन चूरमा: इंजीनियरिंग और कुकिंग का संगम
पिछले 17 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा ने इस बार भी सभी का ध्यान खींचा। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे जेसीबी के पीले पंजे (बकेट) गेहूं के पाउडर के विशाल ढेरों को पलट रहे हैं.
- सामग्री का गणित: इस महाप्रसाद को बनाने में 3,500 किलो शुद्ध देसी घी और 130 क्विंटल चीनी का उपयोग किया गया.
- अनोखी प्रक्रिया: हज़ारों की संख्या में बनी बाटियों को साफ करने के लिए हाई-प्रेशर एयर कम्प्रेसर का इस्तेमाल किया गया, जबकि पिसाई के लिए कृषि थ्रेशर मशीनों की मदद ली गई. अंत में, सामग्री को एकसार करने के लिए जेसीबी ने एक विशाल चम्मच की भूमिका निभाई.
जयपुर में लक्खी मेला 2026 के लिए जेसीबी का उपयोग करके तैयार किया जा रहा है चूरमा
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‘जेसीबी चूरमा’ वायरल वीडियो
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5,000 वॉलिंटियर्स और 'पंच पटेलों' का प्रबंधन
भले ही काम मशीनों से लिया गया, लेकिन इस आयोजन की आत्मा यहाँ के स्थानीय लोग हैं. आसपास के गांवों के लगभग 5,000 स्वयंसेवक कई हफ्तों से इसकी तैयारी में जुटे थे.
- व्यवस्था: गांव के बुजुर्गों यानी 'पंच पटेलों' ने इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व किया.
- भोजन का पैमाना: करीब 200 मीटर लंबी भट्टी पर बाटियां सेंकी गईं. आयोजन की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मंदिर पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की गई.
जरूरत या स्टंट? आयोजकों का पक्ष
मेला आयोजकों का कहना है कि जेसीबी का उपयोग कोई दिखावा नहीं, बल्कि एक मजबूरी और जरूरत है. राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए कम समय में 65 मीट्रिक टन चूरमा हाथों से मिलाना नामुमकिन है. जेसीबी के उपयोग से न केवल समय की बचत होती है, बल्कि मिश्रण भी एक समान और बेहतर तरीके से तैयार होता है.
जयपुर का यह 'लक्खी मेला' आज भारत के उन सबसे अनूठे आयोजनों में शुमार हो चुका है, जहां प्राचीन आस्था को आधुनिक तकनीक का साथ मिलता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jan 29, 2026 03:14 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

