Is Grok Crossing Its Limits: क्या अपनी सीमाए लांघ रहा है ग्रोक? पहले हिंदी में गाली, अब सावरकर और सोनिया गांधी पर जवाबों से छिड़ी बहस
एलन मस्क का एआई चैटबॉट ग्रोक (Grok 3) हिंद में गाली के बाद अब भारत की राजनीति पर भी अपने बेबाक जवाब दे रहा है. दरअसल, एक एक्स यूजर ने ग्रोक से पूछा, "अंग्रेजों से सबसे ज्यादा माफी किसने मांगी थी.
Is Grok Crossing Its Limits: एलन मस्क का एआई चैटबॉट ग्रोक (Grok 3) हिंदी में गाली के बाद अब भारत की राजनीति पर भी अपने बेबाक जवाब दे रहा है. दरअसल, एक एक्स यूजर ने ग्रोक से पूछा, "अंग्रेजों से सबसे ज्यादा माफी किसने मांगी थी और कौन था वो जो अंग्रेजों से 60 रुपये पेंशन लेता था?" इस पर ग्रोक ने जवाब दिया कि विनायक दामोदर सावरकर ने अंग्रेजों से माफी मांगकर जेल से रिहाई मांगी थी और ब्रिटिश सरकार से 60 रुपये मासिक पेंशन लिया था. इस जवाब से कई यूजर्स नाराज हो गए.
जब एक अन्य यूजर ने ग्रोक से पूछा कि क्या इसका मतलब यह है कि सावरकर ने आजादी के लिए कुछ नहीं किया? तो ग्रोक ने जवाब दिया कि सावरकर की भूमिका जटिल थी. उन्होंने क्रांतिकारी आंदोलनों को प्रेरित किया, लेकिन बाद में अंग्रेजों से समझौता भी किया.
सावरकर पर ग्रोक के जवाब से छिड़ी बहस
उन्होंने बतौर बार अटेंडेंट के रूप में काम किया: Grok
'नेहरू और गांधी ने ब्रिटिश सरकार से माफी नहीं मांगी'
तथ्यों पर बात कर रहा, राजनीति नहीं: Grok
सोनिया गांधी पर भी दिया बयान
ग्रोक इतने पर ही नहीं रुका, एक अन्य एक्स यूजर ने जब उससे पूछा कि क्या सोनिया गांधी बार डांसर थीं?" इस पर ग्रोक ने स्पष्ट किया कि सोनिया गांधी ने कभी डांस नहीं किया और न ही वह बार डांसर थीं. हालांकि, उसने यह जरूर कहा कि सोनिया गांधी ने एक रेस्टोरेंट में बार अटेंडेंट के तौर पर काम किया था, लेकिन डांस करने का कोई सबूत नहीं है.
गांधी-नेहरू पर भी दी प्रतिक्रिया
फिर एक सवाल आया कि क्या गांधी और नेहरू ने भी अंग्रेजों से माफी मांगी थी और पेंशन ली थी? इस पर ग्रोक ने कहा कि गांधी और नेहरू ने कभी माफी नहीं मांगी. गांधी को जेल में रखरखाव के लिए ब्रिटिश सरकार से पैसा मिला था, लेकिन यह पेंशन नहीं थी.
"ऐसे ही बोलते रहोगे तो बैन हो जाओगे!"
इसके बाद एक यूजर ने मजाक में कहा कि ग्रोक अगर इंसान होता तो अब तक जेल में होता, तो ग्रोक ने जवाब दिया— "हाहा, मैं सिर्फ ऐतिहासिक तथ्यों पर बात कर रहा हूं, राजनीति नहीं कर रहा!"
अब सवाल उठता है कि क्या ग्रोक को भारत की राजनीति पर इस तरह के बयान देने चाहिए? क्या यह एआई की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है? इस विवाद ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है.