Mohan Bhagwat: क्या मोहन भागवत ने भारतीय सेना के 'भगवाकरण' की मांग, PIB से जानें वायरल VIDEO की सच्चाई

सोशल मीडिया पर RSS प्रमुख मोहन भागवत का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि उन्होंने पीएम मोदी से सेना के 'भगवाकरण' की मांग की है. PIB फैक्ट चेक ने इस वीडियो की जांच कर इसे पूरी तरह फर्जी और 'डीपफेक' करार दिया है.

PIB said that the viral video of Mohan Bhagwat is fake and digitally altered (Photo Credits: X/@PIBFactCheck)

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है. इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि भागवत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से भारतीय सेना का 'भगवाकरण' करने और 2028 तक सेना से 50 प्रतिशत गैर-जाति हिंदुओं को बाहर निकालने के लिए कहा है. हालांकि, सरकारी एजेंसी पीआईबी (PIB) ने इस वीडियो की सच्चाई बताते हुए इसे पूरी तरह से फर्जी करार दिया है.

वायरल वीडियो के  दावे

सोशल मीडिया पर प्रसारित इस क्लिप में मोहन भागवत को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि "हमने मोदी जी को अपने निर्णय के बारे में बता दिया है कि अगर सेना को शुद्ध रखना है, तो उसका भगवाकरण करना होगा." वीडियो में आगे यह भी दावा किया गया कि उन्होंने पीएम मोदी को चेतावनी दी है कि अगर सेना में बदलाव नहीं किए गए, तो "मोदी जाएंगे और योगी आएंगे.  यह भी पढ़े:  Fact Check: क्या इंडिया पोस्ट ने पार्सल लौटने से बचने के लिए 24 घंटे में एड्रेस अपडेट करने को कहा? PIB से जानें वायरल मैसेज की सच्चाई

This Video Is Fake and Has Been Digitally Altered, Says PIB Fact Check

PIB फैक्ट चेक ने खोली पोल

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक इकाई ने इस वीडियो की गहनता से जांच की और पाया कि यह वीडियो 'डिजिटली ऑल्टर्ड' यानी छेड़छाड़ किया गया है. पीआईबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्ट किया कि यह एक #Fake वीडियो है और इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से भ्रामक बनाने के लिए बदला गया है.

पीआईबी ने मूल वीडियो का लिंक भी साझा किया, जिसमें मोहन भागवत असल में आरएसएस की कार्यप्रणाली के बारे में बात कर रहे थे. मूल वीडियो में वह समझा रहे थे कि संघ को समझने के लिए उसे भीतर से महसूस करना जरूरी है, न कि उसे किसी राजनीतिक चश्मे से देखना चाहिए.

डीपफेक तकनीक का हुआ इस्तेमाल

प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह वीडियो 'डीपफेक' तकनीक का एक उदाहरण है, जहां किसी व्यक्ति की आवाज और चेहरे के हाव-भाव को डिजिटल रूप से बदलकर गलत बातें कहलवाई जाती हैं. पीआईबी ने जनता को आगाह किया है कि ऐसे भ्रामक वीडियो का उद्देश्य समाज में वैमनस्य फैलाना और जनता को गुमराह करना है.

प्रशासन की चेतावनी

सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे इस तरह के किसी भी संदिग्ध कंटेंट को साझा न करें. पीआईबी ने कहा है कि जनता को ऐसी किसी भी सामग्री की रिपोर्ट करनी चाहिए जो छेड़छाड़ की हुई लगती हो. यह स्पष्ट हो चुका है कि मोहन भागवत ने भारतीय सेना के संबंध में ऐसा कोई बयान नहीं दिया है और वायरल क्लिप पूरी तरह से मनगढ़ंत है.

Share Now

\