Aaj Ka Viral Video: फ्रांस (France) की राजधानी पेरिस (Paris) से सामने आए एक वीडियो ने इंटरनेट पर हलचल मचा दी है. वायरल क्लिप में भारतीय पर्यटकों (Indian Tourists) का एक समूह पेरिस के एक प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर घूमते हुए जोर-जोर से 'जय महाराष्ट्र' (Jai Maharashtra) और 'छत्रपति शिवाजी महाराज की जय' (Chhatrapati Shivaji Maharaj Ki Jai) के नारे लगाता दिख रहा है. हालांकि कुछ लोगों ने इसे क्षेत्रीय गौरव की अभिव्यक्ति माना, लेकिन सोशल मीडिया (Social Media) पर एक बड़े वर्ग ने इसे सार्वजनिक शांति में खलल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'सिविक सेंस' की कमी बताया है. यह भी पढ़ें: Total Gaming Expose: फ्री फायर फेम 'टोटल गेमिंग' ने लीक हुई चैट एक्सपोज पर एक क्रिप्टिक इंस्टाग्राम स्टोरी के साथ किया पलटवार
क्या है पूरा मामला?
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पर्यटकों का समूह एक स्ट्रीट परफॉर्मर (सड़क कलाकार) के पास खड़ा है. नारेबाजी के दौरान समूह का एक सदस्य कलाकार के कंधे पर हाथ रखकर जोर-जोर से नारे लगा रहा है. वीडियो में साफ दिख रहा है कि वह कलाकार पर्यटकों की तेज आवाज से असहज महसूस कर रहा है और हाथ के इशारे से उन्हें आवाज धीमी करने का अनुरोध कर रहा है. इसके बावजूद, समूह के अन्य सदस्य भी उनके साथ नारों को दोहराना जारी रखते हैं.
सोशल मीडिया पर छिड़ी 'शिष्टाचार' की बहस
यह वीडियो इंस्टाग्राम और 'X' (पूर्व में ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म पर वायरल होने के बाद नेटिजन्स दो गुटों में बंट गए हैं:
- आलोचकों का तर्क: कई यूजर्स का कहना है कि विदेशों में इस तरह का व्यवहार भारतीय पर्यटकों की छवि खराब करता है. एक यूजर ने लिखा, 'अगर हम वैश्विक स्तर पर सम्मान पाना चाहते हैं, तो हमें स्थानीय नियमों और सार्वजनिक शिष्टाचार का पालन करना सीखना होगा.'
- समर्थकों का रुख: कुछ लोगों ने इसे केवल अपनी संस्कृति और पहचान के प्रति उत्साह बताया. उनका तर्क है कि इसमें किसी का अपमान करने की मंशा नहीं थी.
भारतीय पर्यटक ने पेरिस की सड़कों पर लगाए 'जय महाराष्ट्र' के नारे
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पर्यटन विशेषज्ञों की राय
ट्रैवल एक्सपर्ट्स अक्सर "जैसा देश, वैसा भेष" (When in Rome, do as the Romans do) की सलाह देते हैं. यूरोपीय देशों, विशेषकर पेरिस जैसे शहरों में सार्वजनिक स्थानों पर चिल्लाना या शोर मचाना सामाजिक शिष्टाचार के खिलाफ माना जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में भारतीय यात्रियों के प्रति नकारात्मक रूढ़ियों (Stereotypes) को बढ़ावा दे सकती हैं.
यह पहली बार नहीं है जब भारतीय पर्यटकों के व्यवहार की विदेशों में आलोचना हुई हो. इससे पहले भी होटलों में गंदगी फैलाने या सार्वजनिक स्थलों पर तेज संगीत बजाने जैसी घटनाओं ने सुर्खियां बटोरी हैं. यह ताजा घटना एक बार फिर इस ओर इशारा करती है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान सांस्कृतिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना कितना अनिवार्य है.













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