Winter Solstice 2025: शीत अयनांत वह खगोलीय घटना है जब उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात होती है. इस दिन सूर्य आकाश में अपनी सबसे निचली स्थिति पर होता है और इसके बाद धीरे-धीरे दिन बड़े होने लगते हैं. आमतौर पर यह 21 या 22 दिसंबर को पड़ता है. भारत में इसे दिसंबर सोलस्टाइस भी कहा जाता है. इस साल शीत अयनांत (Winter Solstice) रविवार, 21 दिसंबर 2025 को मनाया जाएगा. यह खगोलीय घटना वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. भारत में शीत अयनांत का संबंध ऋतु परिवर्तन, सूर्य की गति और उत्तरायण से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं से है. आइए विस्तार से जानते हैं दिसंबर सोलस्टाइस पर भारत में सूर्योदय-सूर्यास्त का समय और इसका ज्योतिषीय महत्व… यह भी पढ़ें: International Yoga Day 2025: 21 जून को ही क्यों मनाते हैं अंतरराष्ट्रीय योग दिवस? जानें भारतीय पीएम की किन बातों से प्रभावित हुआ था संयुक्त राष्ट्र संघ!
शीत अयनांत 2025: तिथि और समय (भारत में)
| घटना | तिथि और समय |
| शीत अयनांत / दिसंबर सोल्सटिस | 21 दिसंबर 2025 |
| दिन | रविवार |
| शीत अयनांत का समय | रात 08:32 बजे (IST) |
| सूर्योदय | 07:10 AM |
| सूर्यास्त | 05:29 PM |
| कुल दिन की अवधि | 10 घंटे 19 मिनट 11 सेकंड |
दिसंबर सोलस्टाइस या विंटर सोलस्टाइस का यह दिन उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे कम प्रकाश वाला दिन होता है. इसके बाद हर दिन दिन की अवधि धीरे-धीरे बढ़ने लगती है.
शीत अयनांत क्या है?
शीत अयनांत वह खगोलीय स्थिति है जब पृथ्वी का अक्ष सूर्य से सबसे अधिक (लगभग 23°26’) झुका होता है. इस कारण उत्तरी गोलार्ध में सूर्य वर्ष में सबसे नीचे दिखाई देता है. साल में दो बार सोलस्टाइस होता है. पहला जून में और दूसरा दिसंबर मेें. जून सोलस्टाइस पर उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन होता है और दिसंबर सोलस्टाइस पर उत्तरी गोलार्ध में सबसे छोटा दिन होता है.
- जून सोलस्टाइस: उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन
- दिसंबर सोलस्टाइस: उत्तरी गोलार्ध में सबसे छोटा दिन
सूर्य के इसी झुकाव के कारण दिसंबर में भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और चीन जैसे देशों में सर्दी और छोटे दिन होते हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, अर्जेंटीना और चिली जैसे देशों में गर्मी और सबसे लंबे दिन होते हैं.
वैश्विक ऋतु परिवर्तन और शीत अयनांत
दिसंबर सोलस्टाइस के दौरान उत्तरी गोलार्ध में कड़ाके की सर्दी होती है, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में ग्रीष्म ऋतु होता है, इसलिए सोलस्टाइस को दो नामों से जाना जाता है. जून सोलस्टाइस (Northern Solstice) और दिसंबर सोलस्टाइस (Southern Solstice). शीत अयनांत को हाइबरनल सोलस्टाइस भी कहा जाता है, जो ठंड, विश्राम और आत्ममंथन का संकेत देता है.
हिंदू ज्योतिष में शीत अयनांत
हिंदू ज्योतिष में शीत अयनांत को सयनीय (Tropical) उत्तरायण की शुरुआत माना जाता है. वहीं सायडेरियल उत्तरायण की शुरुआत मकर संक्रांति से होती है. यह परिवर्तन देवकाल की शुरुआत का संकेत देता है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है. इस काल को आध्यात्मिक साधना, धार्मिक अनुष्ठान, शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए उत्तम माना जाता है. यह सूर्य की गति और मानव जीवन पर उसके प्रभाव की प्राचीन समझ को दर्शाता है।
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
शीत अयनांत ठहराव, संतुलन और नई शुरुआत का प्रतीक है. जब अंधकार अपने चरम पर होता है, तभी प्रकाश की वापसी की प्रक्रिया शुरू होती है. दुनिया भर की संस्कृतियों में यह दिन आशा, परिवर्तन और प्रकृति के साथ सामंजस्य का संदेश देता है. शीत अयनांत 2025 हमें याद दिलाता है कि सबसे लंबी रात के बाद भी रोशनी लौटती है, पुराने चक्र समाप्त होकर नए चक्र शुरू होते हैं, इसके साथ ही यह बताता है कि आत्मचिंतन और शांति से आगे बढ़ने का समय भी आता है.













QuickLY